Thursday, October 21, 2021
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यूपी की राजनीतिक मर्यादा ‘अब्बूजान’ से हैरान-परेशान!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भले अभी लगभग आधा साल बचा हो, लेकिन यहां राजनीतिक हस्तियों का चाल-चरित्र-चिंतन सामने अभी से आ रहा है। यह भी सामने आ रहा है कि यूपी की राजनीति विकास से परे जाति-मजहब के इर्द-गिर्द ही घूमती है। यहां अब्बूजान चर्चा में हैं। कौन अब्बूजान और किसके? असल में बीते दिनों एक टीवी शो के साक्षात्कार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य विपक्षी दल समाजवादी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव को पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का अब्बूजान करार दे दिया था। यह बात अखिलेश को अखर गई और मामला अब तूल पकड़ चुका है।

लखनऊ में अखिलेश ने बकायदा प्रेस-कान्फ्रेंस बुलाकर इसका जवाब दिया था। जवाब में कहा कि सीएम को संयम बरतना चाहिये क्योंकि मैं भी उनके बारे में टिप्पणी कर सकता हूं। बात यहीं आयी गई नहीं हुई है। इस बार मुलायम के भाई और अखिलेश के चाचा भी अब्बूजान मसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उसी भतीजे के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, जिसमें उन्हें पार्टी से बाहर जाकर अपनी नयी पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया बनाने को मजबूर कर दिया था।

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अब राजनीति तो राजनीति है, यहां न तो मुर्दे गाड़े जाते हैं और रिश्ते हमेशा के लिए खत्म किये जाते हैं। ताजा बयान में शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि राजनेताओं को भाषा की मर्यादा का अनुसरण करना ही चाहिए। उनका तर्क रहा कि, राजनेता के कहे गए शब्दों का जनता पर बहुत असर पड़ता है। राजनेता समझबूझ कर ही शब्दों का इस्तेमाल करें, न कि बगैर सोचे-समझे। मालूम हो कि सपा नेता राम गोपाल यादव भी अब्बूजान वाले बयान पर मार्यादित भाषा वाली प्रतिक्रिया दे चुके हैं।

कहां से आया अब्बूजान ?

असल में अखिलेश यादव को घर वाले टीपू नाम से ही पुकारते हैं। इस नाम के पीछे की एक कहानी बतायी जाती है। यादव परिवार के पैतृक गांव सैफ ई के दिंवगत प्रधान और मुलायम सिंह यादव के जिगरी दोस्त दर्शन सिंह यादव ने अखिलेश यादव के जन्म होते ही उनका नाम टीपू रख दिया था, हालांकि शुरुआत में गांव वालों को टीपू नाम समझ में नहीं आया और इसके प्रति कोई दिलचस्पी भी किसी ने नहीं दिखायी। बाद में जब गांव वालों को टीपू सुल्तान की कहानी बताई और समझाई भी गई तो गांव वाले टीपू नाम रखने पर बामुश्किल से संतुष्ट हुए। तभी अखिलेश को लोग प्यार से टीपू ही पुकारते आ रहे हैं। गौरतलब है कि, 2012 में जब समाजवादी पार्टी को जब सम्पूर्ण बहुमत मिला तो उनके मुख्यमंत्री बनने पर मीडिया में टीपू के सुल्तान बनने का शीर्षक सुर्खियां बना।

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