Nithari Case : निठारी कांड मामले में बयान से मुकरने पर नंदलाल को साढ़े तीन साल की सजा और दस हजार जुर्माना

 
निठारी कांड

नोएडा। जिले के बहुचर्चित निठारी कांड मामले में निठारी निवासी नंदलाल को बयान बदलकर झूठे बयान दर्ज कराने के मामले में गाजियाबाद की एसीजेएम कोर्ट संख्या 3 ने दोषी मानते हुए साढ़े तीन साल की सजा और दस हजार का जुर्माना की सजा सुनाई है। 

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ये था मामला :

नोएडा के निठारी की रहने वाले नंदलाल की पुत्री पायल और दीपिका अपनी व अपने भाई की नौकरी की तलाश कर रही थीं। जिनको 7 मई 2006 को नौकरी के लिए मोनिंदर सिंह पंढेर ने बुलाया था। लेकिन उसके बाद से वह वापस नहीं लौटी। 8 मई 2006 को नंदलाल ने नोएडा थाना सेक्टर 20 मे गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। दिनांक 24 अगस्त 2006 को नंदलाल ने कोर्ट के माध्यम से मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली के खिलाफ मामला दर्ज कराया।

जब गहन जांच हुई तो पायल का मोबाइल सुरेंद्र कोली के पास से बरामद हुआ और सुरेंद्र कोली व पंढेर की निशानदेही पर कोठी नंबर डी पांच के नाले व गैलरी से पायल की चप्पल ,कपड़े के अलावा अनेकों नर कंकाल भी बरामद हुए। जिनके डीएनए लेकर वहां के गायब हुए बच्चों के माता-पिता का डीएनए से मिलान किया गया। यानी इस मामले में कुल 16 मुकदमें दर्ज किए गए थे। यह सभी मामले गत 11 जनवरी 2007 को सीबीआई को सौंप दिए गए। इनमें पंढेर के खिलाफ 6 मामले चले। जिसमें सिर्फ पंधेर को तीन मामलों में फांसी की सजा अब तक हुई है। लेकिन पायल के मामले में नंदलाल अपने पहले दिए बयानों से मुकर गया तो इस मामले में पंधेर फांसी की सजा से बच गया।


इस मामले की जानकारी देते हुए अधिवक्ता खालिद खान ने बताया कि 22 मार्च 2007 को सीबीआई ने पायल मामले में सुरेंद्र कोली के खिलाफ हत्या और पंधेर के खिलाफ अनैतिक व्यापार कानून में चार्जशीट पेश की थी। पूर्व सीबीआई जज रमा जैन के सामने पहली बार ये मामला 6 जुलाई 2007 में में सामने आया जिसमें नंदलाल ने कोर्ट में अपना बयान दिया कि मोनिंदर सिंह पंढेर ने उसके सामने सभी हत्याओं को किए जाने का जुर्म कबूल कर लिया था। इसके बाद उसके सामने पंढेर और सुरेंद्र कोली ने हत्या में इस्तेमाल आरी भी बरामद कराई थी। इन बयानों पर नंदलाल ने पंधेर को हत्या का आरोपी भी बनवाया।

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लेकिन इसके बाद गवाह नंदलाल ने पंढेर को फांसी से बचाने के लिए को अपने बयानों से मुकर गया और झूंठे नए बयान दिए कि " पंधेर ने ना तो मेरे सामने आरी बरामद कराई और ना ही हत्याएं किए जाने का जुर्म कबूल किया था। गवाह नंदलाल ने अपने बयानों में कहा कि मैंने पहले वाला बयान अपने वकील खालिद खान के कहने पर दिया था। जिसके बाद निठारी पीड़ित ही वंदना सरकार व अनिल हलदर ने अधिवक्ता खालिद खान से सीबीआई कोर्ट में नंदलाल के खिलाफ बयान से मुकरने का मामले की जानकारी दी थी। जिसके बाद पूर्व सीबीआई जज रमा जैन ने स्वयं यह मामला दर्ज कराया। उन्होंने बताया कि पायल के मामले में तब रंजीशन नंदलाल ने उत्तराखंड में अपनी हत्या के प्रयास का एक फर्जी मुकदमा उनके खिलाफ दर्ज कराया दिया था। जिसे पुलिस ने झूठा पाकर समाप्त कर दिया।


अधिवक्ता खालिद खान ने बताया कि हाईकोर्ट इलाहाबाद में तीन महीने में इस केस को निपटाने का आदेश दिया था। 9 मई 2022 को निर्णय को रोकने के लिए फिर से नंदलाल ने डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र दिया। जो खारिज हो गया। इसके बाद जिला जज ने 24 मई 2022 को खारिज हुए इस मामले में नियत तिथि पर निर्णय करने का आदेश दिया। जिसके चलते 27 मई 2022 को न्यायालय एसीजेएम कोर्ट संख्या तीन गाजियाबाद ने नंदलाल को दोषी करार देते हुए उसका अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। आज 31 मई 2022 को कोर्ट ने नंदलाल को दोषी मानते हुए साढे तीन साल की सजा और दस हजार रुपये का जुर्माना की सजा सुनाई।