ज्ञानवापी मस्जिद पर मौलाना तौकीर का बयान कानून—व्यवस्था बिगाड़ने वाला : जैनुरार्शिददीन

 
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मेरठ। इंडिया इस्लामिक सेंटर में हाल ही में आयोजित एक सम्मेलन में, मौलाना तौकिर रज़ा खान (अध्यक्ष-इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल) ने दो लाख मुसलमानों को प्रत्येक जिले में इकट्ठा होने और खुद को गिरफ्तार करने के लिए कहा। जो कि वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के विवाद के विरोध के निशान के रूप में था। उनके इस बयान की निंदा मेरठ के जमीयत उलमा हिंद के अध्यक्ष जैनुरार्शिददीन ने की। जैनुरार्शिददीन ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद मसला किसी एक दल,संगठन या समुदाय का मसला नहीं है यह पूरे देश से जुड़ा मसला है। देश की कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की क्षमता रखने वाली इस टिप्पणी के लिए इस्लामी परिप्रेक्ष्य से ' विरोध संस्कृति' (प्रोटेस्ट कल्चर) की जांच जरूरी हो गई है।  

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उन्होंने एक बैठक में कहा कि इतिहास ने हमें दिखाया है कि अधिकारियों या सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ विद्रोह ने मुसलमानों के लिए कभी भी कुछ अच्छा नहीं किया है। आज की दुनिया में,लोकतांत्रिक व्यवस्था असहमति के लिए जगह देती है लेकिन पिछले अनुभव हमें बताते हैं कि ये असंतोष धीरे-धीरे विरोध का रूप ले लेते हैं जो अक्सर हिंसक हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप संपत्ति और जीवन का नुकसान होता है, जो की इस्लाम में बेहद घृणित है। जैनुरार्शिददीन ने कहा कि हड़ताल, विरोध रैलियां, स्वैच्छिक गिरफ्तारी न केवल सामान्य नजरिए से बल्कि इस्लाम के नजरिए से भी गलत हैं। इस्लाम विशेष रूप से मुसलमानों को 'फितना' से बचने के लिए कहता है जिसमें किसी भी देश की शांति और सद्भाव को बिगाड़ने की क्षमता होती है।  विरोध संस्कृति ने न केवल व्यक्तिगत क्षमता में विनाश लाया है बल्कि अतीत में राष्ट्रों को भी नष्ट कर दिया है। जमीयत के मेरठ अध्यक्ष ने कहा कि ज्ञानवापी मामले की सुनवाई फिलहाल न्यायालय में चल रही है। पैगंबर और कुरान की शिक्षाओं पर आधारित मुसलमानों को धैर्य रखना चाहिए और न्यायपालिका में विश्वास रखना चाहिए। जो सच्चाई को सामने लाएगी और न्याय दिलाएगी। तौकीर रजा खान जैसे लोगों द्वारा सुझाए गए विरोध (किसी भी रूप में) का आयोजन न केवल मुसलमानों को कानून के खिलाफ बल्कि इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ भी पेश करेगा।