Gyanvapi Case: ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी प्रकरण में अदालत ने दिया एतिहासिक फैसला, खारिज की अंजुमन इंतेेजामिया मसाजिद की दलील

 
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वाराणसी। ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी प्रकरण में दाखिल प्रार्थना पत्र पर आज सोमवार को फैसला आ गया। जिसमें अदालत ने मसाजिद कमेटी की दलील को खारिज कर दिया। वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर को लेकर दायर मुकदमा मामले में अदालत ने दोपहर सवा दो बजे फैसला सुना दिया। वाराणसी जिला जज ने अपना ऐतिहासिक निर्णय देते हुए कहा कि उपरोक्त मुकदमा न्यायालय में चलने योग्य है। यह निर्धारित करते हुए प्रतिवादी संख्या चार अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी द्वारा अदालत को दिए 7/11 के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।

दोपहर एक बजे तक दोनों पक्षों के अधिवक्ता अदालत परिसर में पहुंचे और अपने पक्ष के वादी प्रतिवादी से मुलाकात कर विचार विमर्श किया। अदालत में हिंदू पक्ष की ओर से वादिनी महिला तो मुस्लिम पक्ष की ओर से अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के सदस्‍या कोर्ट पहुंच गए। हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने चैंबर में मुलाकात और ईश्‍वर से प्रार्थना करने के बाद सभी ने अदालत का रुख किया। वाराणसी में सुबह से कचहरी परिसर में 250 सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा के बीच गहमाग‍हमी का माहौल था। दोपहर ढाई बजे अदालत का फैसला आने की उम्‍मीद जताई थी। जबकि पुलिस अधिकारियों ने कचहरी में 18 थानों की पुलिस फोर्स को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया था। लगभग दो हजार से अधिक सुरक्षाबलों की तैनाती इस मामले को लेकर कचहरी से लेकर ज्ञानवापी परिक्षेत्र तक की है। 

मंदिर पक्ष ने अदालत में यह साबित करने की कोशिश की थी कि मुकदमा सुनने योग्य है। वहीं दूसरी ओर मस्जिद पक्ष ने इसे स्थानीय अदालत में सुनने योग्य नहीं बताने का प्रयास किया। पूरे प्रकरण की क्रोनोलाजी, मुकदमे के दौरान दोनों पक्ष की प्रमुख दलीलें, मंदिर पक्ष के प्रार्थना पत्र की प्रमुख बातें सुनने के बाद अदालत ने फैसले की तिथि आज 12 सितंबर मुकर्रर की थी। अदालत के फैसले के बाद दोनों पक्ष आगे की विधिक कार्रवाई की रूपरेखा अब तय की जाएगी। लगभग 24 वर्ष पहले प्राचीन मूर्ति स्वयंभू विश्वेश्वर की ओर से कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। उस समय वाराणसी की सिविल जज की अदालत ने मुकदमे को सुनने योग्य नहीं माना गया था। वादी पक्ष ने निगरानी याचिका दाखिल की। प्रथम जिला जज ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर मुकदमा सुनने योग्य माना था। इसके खिलाफ अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने हाईकोर्ट में रिवीजन दाखिल किया।  पुलिस टीम ही नहीं प्रशासिनक स्‍तर पर भी सोशल मीडिया पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अदालत का फैसला आने के दौरान अफवाह नहीं फैले और इससे किसी धार्मिक भावना को चोट पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।