चित्रकूट प्रशिक्षण शिविर: जातीय समीकरण तोड़ने की तैयारी में भाजपा, मंत्रियों के मंडल प्रभार में किया फेरबदल

 
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लखनऊ। चित्रकूट में हुए भाजपा के प्रशिक्षण शिविर के बाद भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियों को लेकर मंत्रियों के मंडलों के प्रभार में फेरबदल किया है। इसे भाजपा संगठन से जोड़ कर देखा जा रहा है। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्री समूह के प्रभार मंडलों में बदलाव कर दिया है। इस बदलाव के तहत पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद को लखनऊ, पंचायती राजमंत्री भूपेंद्र चौधरी को आजमगढ़,संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना को गोरखपुर मंडल और जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को वाराणसी का प्रभार दिया है। प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा की भारी बहुमत से जीत होने के साथ ही पार्टी की सीटें भी घट गई। पार्टी का मानना है कि अगर यह स्थिति लोकसभा चुनावों में रही तो भाजपा के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं। क्षेत्रीय दलों के जातीय समीकरणों को देखते हुए भाजपा ने अब नई रणनीति तैयार की है। भले ही आगामी लोकसभा चुनावों में अब दो साल से कम समय हो। लेकिन भारतीय जनता पार्टी अपने सियासी समीकरणों को साधने के लिए अभी से तैयारियों में जुटी है। चित्रकूट में बीजेपी ने तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया। राज्य स्तरीय ट्रेनिंग कैंप में भाजपा के दिग्गज नेताओं ने रणनीति तैयार की है कि किस तरह पार्टी जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करे। 

चित्रकूट प्रशिक्षण शिविर

चित्रकूट धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बुंदेलखंड इलाके की रणनीति भाजपा ने यहीं से तैयार की है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने कहा कि कार्यकर्ता पार्टी की मूल विचारधारा पर टिके रहें तभी लोकसभा चुनावों की राह आसान होगी। 
भाजपा के इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में कुल 13 सत्र आयोजित हुए। जिसमें जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने का कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया। इसमें योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल पर ही जोर देने और पार्टी को मूल विचारधाराओं पर ही काम करने के लिए कहा गया। 

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उत्तर प्रदेश में भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती जातिवादी समीकरणों को पार करने की है। एक तरफ जहां क्षेत्रिय दलों के पास मजबूत जातीय गठजोड़ का वोट बैंक है। वहीं भाजपा इस कमी से जूझ रही है। राष्ट्रवाद और हिंदुत्व का मुद्दा ही ऐसा भाजपा मान रही है। जिस पर जातियां एकजुट हो जाती हैं।  विधानसभा चुनाव 2022 में उप्र के जातीय समीकरणों ने साबित कर दिया है  कि उसके लिए 2024 की राह बहुत आसान नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जहां  जाट-मुस्लिम समीकरण हैं तो वहीं दूसरी ओर पूर्वी उत्तर प्रदेश में यादव-मुस्लिम समीकरणों ने सपा को 2022 के विधानसभा चुनाव में मजबूत बढ़त दिलाई है। सपा के सहयोगी दल इस चुनाव में फायदे में रहे हैं। ऐसे में जातीय समीकरणों को तोड़कर आगे बढ़ पाना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। अब भाजपा ने पूरा जोर इस बात लगाया है कि सभी जातीय समीकरणों को ध्वस्त कर राष्ट्रवाद की मूल विचारधारा पर आगे बढ़कर एक बार फिर पार्टी को जीत दिलाई जाए।