Allahabad High Court: ऐसे तो गंगा कभी साफ़ नहीं हो सकती, नमामि गंगा प्रोजेक्ट पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

 
Allahabad High Court

उत्तर प्रदेश में ‘नमामि गंगे’ परियोजना पर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहुत सख्त टिप्पणी की है, हाई कोर्ट ने यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के गठन पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्यों न बोर्ड को खत्म कर दिया जाए? हाईकोर्ट ने परियोजना के महानिदेशक को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में गंगा को साफ और निर्मल बनाने में खर्च किए गए अरबों रुपये के बजट का ब्यौरा पेश करें और साथ ही कोर्ट ने यह पूछा कि गंगा अब तक साफ क्यों नहीं हो सकी? अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी। 

याचिकाकर्ता के वकील के इस आरोप पर कि गंगा में शोधित जल नहीं जा रहा है, अदालत में मौजूद जल निगम के परियोजना निदेशक से कोर्ट ने पूछा कि एसटीपी की रोजाना निगरानी कैसे होती है? परियोजना निदेशक द्वारा पेश रिपोर्ट पर अदालत ने असंतोष जताते हुए कहा कि यह तो मंथली रिपोर्ट है, डेली रिपोर्ट कहां है? अदालत सीलबंद रिपोर्ट को देखकर हैरान हुई. रिपोर्ट में जो कुछ था उसपर अदालत ने तीखी टिप्पणी की और कहा कि यह रिपोर्ट सिर्फ आंखों में धूल झोंकने वाली है। कोर्ट ने कहा कि आपने एसटीपी की जिम्मेदारी निजी हाथों में दे रखी है जो काम हीं नहीं कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया गया कि गंगा किनारे बेस 26 शहरों में एसटीपी नहीं है और सैकड़ों उद्योगों का गंदा पानी सीधे गंगा में गिर रहा है।

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बता दें कि अडानी की कंपनी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चला रही है। कंपनी से हुए करार में लिखा है कि किसी समय प्लांट में क्षमता से अधिक गंदा पानी आया तो शोधित करने की जवाबदेही नहीं होगी। अदालत ने ऐसे करार पर भी सवाल उठाया और कहा कि इस तरह से तो गंगा कभी साफ होने वाली नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा कि जब ऐसी संविदा है तो ट्रीटमेंट की जरूरत ही क्या है? अदालत ने सैम्पलिंग पर भी सवाल उठाया और कहा कि पानी की जांच के समय उसमें साफ पानी मिलाकर अच्छी रिपोर्ट तैयार करा ली जाती है। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट से साफ है दूषित पानी सीधे गंगा में जा रहा है।