जरा सी चूक ने सीएम को खलनायक बना दिया….

 
जरा सी चूक ने सीएम को खलनायक बना दिया…. जरा सी चूक ने सीएम को खलनायक बना दिया….

सीएम योगी ने कहा था, कुछ समय तक ही झोंकी जा सकती है जनता की आंखों में धूल

अमित बिश्‍नोई

न्यूज डेस्क। बीते शनिवार को पुलिस महानिदेशक कार्यालय लखनऊ में आयोजित एक समारोह में उत्कृष्ट सेवा पुलिस पदक प्रदान करने पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ ने पुलिसकर्मियों से कहा था कि जरा सी चूक हम सभी को खलनायक बना देती है। जनता आपके सभी कार्यों पर अपनी पैनी नजर रखती है। जनता को अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिये शब्द तलाशने की आवश्यकता नहीं होती उनकी भाव-भंगिमा ही हर दुख-दर्द बयां कर देती है। आप कुछ समय तक ही जनता की आंखों में धूल झोंक सकते हैं। जनता नायक को खलनायक बनाने में देर नहीं करती मगर लोगों से बेहतर संवाद से ये चूक सुधारी जा सकती है।

लखनऊ में पुलिस को नसीहत देने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखीमपुर खीरी हिंसा में भाजपाईयों का नाम सामने आते ही अपनी ही कही बात को भूल गये। एक ओर जहां विपक्षी दलों के नेता लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले मंे मुख्य आरोपी और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री और सांसद अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी की मांग को लेकर अड़े हुए हैं और सुप्रीम कोर्ट भी हत्यारोपी के खिलाफ कार्रवाई न किये जाने पर यूपी सरकार को फटकार लगा चुका है वहीं सीएम योगी हाईकोर्ट की रूलिंग बताकर साक्ष्यों के बिना किसी को गिरफ्तार न किये जाने की बात कह रहे हैं। सीएम योगी के इस बयान को आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी से जोड़ कर देखा जा रहा है। मगर एक सप्ताह पहले पुलिस को नसीहत देकर कार्यप्रणाली में बदलाव लाने की बात कहने वाले सीएम योगी खुद यह अहसास नहीं कर पा रहे हैं कि मंत्री पुत्र को दी जा रही सहूलियत जनता की नजरों में उनको खलनायक बना रही है। वह जनता जो उनकी गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखती है और जिसकी आंखों में ज्यादा समय तक धूल भी नहीं झोंकी जा सकती।

Read also: यूपी में अब्बा जान वाले बयान पर सीएम योगी के खिलाफ बिहार में केस दर्ज

उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद कमान संभाली और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेज कर पीड़ित परिवारों को त्वरित सहायता प्रदान की। हिंसा में जान गंवाने वालों के परिवार को बतौर मुआवजा 45-45 लाख रुपये और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान कर सीएम योगी ने काफी हद तक हालात पर काबू पा लिया था। त्वरित कार्रवाई करने के लिये भाजपा सरकार के धुर विरोधी भाकियू नेता राकेश टिकैत ने भी सीएम योगी की तारीफ की।

लेकिन इसके बाद योगी सरकार ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को बिना एफआईआर दर्ज किये हिरासत में रखा, विपक्षी दलों के नेताओं को लखीमपुर खीरी जाने से रोका, वहां इंटरनेट बंद किया जैसी बातों को जनता ने शांति बहाली के लिये उठाये गये जरूरी कदम भी मान लिया। मगर इस हिंसा में मुख्य आरोपी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री और सांसद अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी न किये जाने से योगी सरकार की छवि पर दाग लग गया है। ऊपर से सीएम की कुर्सी पर बैठै व्यक्ति का किसी हत्या के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी बिना साक्ष्यों के न करने की बात कहना भी योगी आदित्यनाथ की छवि के विपरित है। गुंडों-माफियाओं का दमन कर प्रदेश को अपराध मुक्त करने का संकल्प लेने वाली योगी सरकार का एक हत्यारोपी को समर्थन देना जनता को स्वीकार नहीं हो रहा।

Read also: पीएम मोदी और सीएम योगी पर पर टिप्पणी कर फंसे असदुद्दीन ओवैसी , एफआईआर दर्ज

निःसंदेह कौन अपराधी है यह तय करने का अधिकार सिर्फ कोर्ट के पास है जो सबूतों की रोशनी में अपना निर्णय सुनाती है। मगर यदि किसी ऐसी घटना जिसमें लोगों की मौत हुई हो और कोई चश्मदीद गवाह भी हो जो हत्यारोपी के वहां मौजूद होने की पुष्टि करता हो तो ऐसा व्यक्ति भले ही हत्यारा न हो मगर हत्यारोपी तो है ही। जब इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर और लोगोें की गिरफ्तारी की जा सकती है तो कंेद्रीय मंत्री के बेटे की तरफदारी सीएम योगी क्यों कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को गिरफ्तार करना तो पुलिस की मजबूरी है। संभवतः आज ही वह जांच एजेंसियों के सामने पेश हो और उसे गिरफ्तार कर लिया जाये। लेकिन यदि यही पेशी घटना के तुरंत बाद हो जाती तो योगी सरकार की छवि पर दाग नहीं लगता। सरकार पर अपराधी को बचाने का आरोप भी नहीं लगता। जनता की नजरों में सीएम खलनायक नहीं बनते बल्कि उनकी नायकी में एक स्टार और बढ़ जाता। उनकी सुशासक की छवि में और निखार आता और जनता का विश्वास उनके शासन पर और बढ़ जाता जिसका लाभ आने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिल सकता था। मगर थोड़ी सी चूक, थोड़ी सी देरी और थोड़ी सी जिद ने सीएम को खलनायक बना दिया है।