Big Breaking: गूगल के एकाधिकार पर लगाम कसने की तैयारी में मोदी सरकार, यूरोप लगा चुका जुर्माना अमेरिका में भी विधेयक पास

 
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नई दिल्ली। गूगल और फेसबुके एकाधिकार को कम करने के लिए अब विश्व के देश सक्रिय हो गए हैं। पहले यूरोप ने भारी भरकम जुर्माना लगाया था। अब भारत की मोदी सरकार गूगल और फेसबुक के एकाधिकार को तोड़ने के लिए काम कर रही है। भारत ने अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया की तर्ज पर गूगल एवं फेसबुक जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के एकाधिकार पर शिकंजा कसने के लिए ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) गूगल और अन्य टेक कंपनियों की तकनीकी गैर-जिम्मेदारियों एवं भारतीय प्रकाशकों के साथ गैर-प्रतिस्पधÊ व्यवहार के खिलाफ तेजी से कदम उठाने पर काम कर रहा है। संसदीय समिति टेक दिग्गजों की मनमानी और एकाधिकार से जुड़ी चिंताओं पर गहन तरीके से विचार-विमर्श कर रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर टेक कंपनियों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर गैर-प्रतिस्पर्धा को लेकर मुहिम में भारत की भूमिका का नेतृत्व कर रहे हैं। बोट्स और एल्गोरिदम के माध्यम से इंटरनेट का दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त नियम लाने पर सरकार विचार कर रही है। इसी कड़ी में अब सोशल मीडिया कंपनियों के लिए तिमाही ऑडिट रिपोर्ट जारी करना अनिवार्य कर दिया है। सीसीआई गूगल के खिलाफ विज्ञापन राजस्व में हिस्सेदारी नहीं देने को लेकर डिजिटल समाचार प्रकाशक संघ (डीएनपीए) की याचिका पर पहले से जांच कर रहा है। राजस्व हिस्सेदारी के लिए डीएनपीए के नेतृत्व में देश के कई मीडिया संगठन गूगल और अन्य दिग्गज टेक कंपनियों के खिलाफ एकजुट हुए हैं। 

यूरोप में नियामकों और अदालत की सख्ती के बाद गूगल पर एकाधिकार के मामले में 400 करोड़ डॉलर यानी करीब 31,860 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कंपनी पर आरोप था कि गूगल ने सर्च इंजन को फायदा पहुंचाने के लिए एंड्रॉयड फोन निर्माताओं पर कई प्रतिबंध लगाए। दक्षिण कोरिया ने भी गूगल पर प्रतिस्पर्धा खत्म करने मामले में जुर्माना लगाया। जांच में पता चला कि गूगल यूजर्स का डाटा जुटाने के साथ उनके वेबसाइट उपयोग पर नजर रख रही थी। वहीं अब अमेरिका में भी विधेयक जल्द पारित कराने की मांग उठने लगी है। अमेरिका की 13 प्रभावी मीडिया कंपनियों ने गूगल पर लगाम कसने के लिए कांग्रेस में लाए प्रस्तावित विधेयक को जल्द पारित करने की मांग की है।