Eid-Al-Adha: देश के इस राज्य में नहीं है पशुओं के कुर्बानी की अनुमति,पशुओं के वध को लेकर सख्ती

 
Bakra Eid 2022 Guidelines

अगरतला। ईद उल-अजहा (बकरीद) के मौके पर आज पशुओं की कुर्बानी देनी की परंपरा है। लेकिन त्रिपुरा के अगरतला में पशु वध के मद्देनजर पशु संसाधन विकास विभाग ने सख्ती दिखाई है। पशु क्रूरता रोकथाम को लेकर पशु संसाधन विकास विभाग सचिव डॉ. टीके देबनाथ ने कहा कि ईद उल-अजहा (बकरीद) के मौके पर अगरतला के शहरी क्षेत्रों में किसी पशु वध की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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डॉ देबनाथ ने निदेशक डीके चकमा संग अगरतला के सिविल सेक्रेटेरिएट में में घोषणा की है कि आज रविवार को अगरतला के शहरी क्षेत्रों में किसी वध की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह पशु क्रूरता निवारण  नियम 2001 से संबंधित है। उन्होंने कहा कि अगर शहर में ऐसा हुआ तो वध को पूरी तरह से अवैध माना जाएगा और संबंधित को दंडित किया जाएगा।


उन्होंने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड की अधिसूचना का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और पशु क्रूरता निवारण (वधशाला) नियम 2001 पर देश में ध्यान केंद्रित करते हुए संबंधित विभागों को एक पत्र जारी किया गया था। 


डॉ देबनाथ ने कहा कि प्रवर्तन विभाग और राज्य के डीजीपी को क्षेत्रों में इस तरह के अवैध वध को रोकने के लिए अधिसूचना पर गंभीरता से ध्यान देने के लिए सूचित किया है। अधिनियम कहता है कि कसाईखाने के बिना, किसी पशु वध को अवैध माना जाना चाहिए। ऐसा करने वालों को दंडनीय अपराध के रूप में सजा का प्रावधान है। 

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उन्होंने कहा कि यह अधिनियम या परिवहन अधिनियम 1978 को तोड़कर पशुओं को एक जगह से दूसरे जगह ले जाते है। जिसके परिणामस्वरूप परिवहन के दौरान पशुओं की मौत हो जाती है। पशु क्रूरता निवारण (वधशाला) नियम 2001 कहता है कि गर्भवती पशु, बीमार पशु, तीन महीने से कम उम्र के बछड़ों का वध नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा करने वालों को नियमों के अनुसार दंडित किया जाएगा।