Uttarakhand News Today: उत्तराखंड में नेताओं और अधिकारीयों की प्रयोगशाला बनी शिक्षा व्यवस्था, रामायण-महाभारत के बाद अब संस्कृत ग्राम योजना

 
Uttarakhand News Today

देहरादून। उत्तराखंड में बच्चें रामायण ,महाभारत के साथ साथ अब विज्ञानं की पढ़ाई भी संस्कृत में करने जा रहे है। राज्य में संस्कृत ग्राम योजना के तहत इसी सत्र से बच्चें संस्कृत की पढाई कुछ अलग अंदाज में करने जा रहे है।  सूबे के 13 जिलों में 13 संस्कृत गांव बनाने की इस योजना के पीछे राज्य की दूसरी भाषा संस्कृत के उत्थान की सरकार सोच रही है। उत्तराखंड में संस्कृत ग्राम योजना और रामायण,महाभारत व् स्थानीय संस्कृत का ज्ञान दिए जाने के दावों के बीच उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था एक प्रयोग शाला सी नजर आ रही है। 

 क्या है संस्कृत ग्राम योजना ? 

प्रदेश के सभी 13 जिलों में एक -एक संस्कृत ग्राम बनाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य है कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों को संस्कृत में बेसिक शिक्षा मुहैया कराई जाए। राज्य के सभी 13 जिलों में 13 संस्कृत ग्राम का विकास की जाना है। इस योजना में बच्चों को प्राथमिक स्तर पर प्राइमरी लेवल में संस्कृत की शिक्षा मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए शिक्षकों को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, अलग से किसी स्कूल का निर्माण नहीं होगा। शिक्षा सचिव चंद्रेश यादव ने कहा कि उत्तराखंड में संस्कृत द्वितीय राजभाषा है। संस्कृत के उन्नयन के लिए इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश के 13 जिलों में संस्कृत ग्राम के रूप में एक-एक गांव को विकसित किया जाएगा। बच्चों को संस्कृत शिक्षा निदेशालय को सिलेबस निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्राथमिक स्तर पर संस्कृत में बच्चों की पढ़ाई होगी, विज्ञान की पढ़ाई भी संस्कृत में होगी। कक्षा 6 से आगे की पढ़ाई हमारे जिन स्कूलो में पूर्व मध्यमा, मध्यमा, उत्तर माध्यम की पढ़ाई है। उसके लिए बच्चे तैयार हो सके। साथ वो अभी छात्र संस्कृत विश्वविद्यालय में जाकर आगे की पढ़ाई कर सकें।

Read also: केंद्र से भाजपा सरकार को जाना ही होगा: ममता बनर्जी

योजना को लेकर सवालों के नहीं है जवाब

इसी सत्र से शुरू करने के आधिकारिक दावों के बीच कई सवाल इस  योजना को  लेकर उठ रहे है। जिसमे सबसे पहले स्कूलों के ढाँचे को लेकर है जो  अपनी जर्जर हालातो से गुजर रहे उत्तराखंड के स्कूलों के लिए यह दूर की कोड़ी लग रही है। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे उत्तराखंड के स्कूलों के लिए संस्कृत के विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध करना वो भी इसी सत्र में, बड़ी चुनौती होगा। महज एक माह में शिक्षकों और किताबो को लेकर शासन-प्रशासन किस प्लान पर काम करेगा यह बड़ा सवाल है। हो कुछ भी लेकिन फिलहाल तो उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था अधिकारी और नेताओं की  प्रयोगशाला नजर आ रही है।