Zawahiri Pakistan US: सबसे बड़ा सवाल किसकी मदद से मारा अल-जवाहिरी, तालिबान और पाकिस्तान पर घूम रही शक की सुई

 
Zawahiri Pakistan US

नई दिल्ली। अलकायदा सरगना अल-जवाहिरी को अमेरिका ने अफगानिस्तान में मार गिराया है। जवाहिरी को 31 जुलाई को काबुल स्थित उसके घर पर ड्रोन हमले में मारा गया। हालांकि इसका खुलासा भी पूरी पुष्टि होने के बाद अमेरिका ने 48 घंटे बाद ही किया।  
जवाहिरी को मारे जानेे से अमेरिकी मिशन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इनमें सबसे अहम है कि जो अमेरिका बीते अगस्त में अफगानिस्तान छोड जा चुका था उसने काबुल में इतने खतरनाक मिषन को कैसे अंजाम दिया? आखिर अमेरिका को जवाहिरी के काबुल में छिपेे होने की पुख्ता जानकारी कैसे मिली। जिस जगह ऑपरेशन हुआ। वहां अमेरिकी ड्रोन किस रास्ते से होता हुआ पहुंचा? इन सब सवालों के बीच सबसे अहम यह भी है कि आखिर अमेरिका को जवाहिरी के काबुल में छिपे होने की जानकारी मिली तो कैसे।  
जानकारी के मुताबिक जवाहिरी काबुल में जिस जगह पनाह लिए था वहां पर तालिबानों की सक्रियता काफी है। खासकर तालिबान के सबसे मजबूत और खूंखार हक्कानी गुट की। हक्कानी के कई सदस्य इसी इलाके में रहते हैं। ऐसे में यह काफी मुश्किल है कि जवाहिरी जैसे आतंकी के काबुल में छिपे होने की बात तालिबान को पता नहीं हो। यह शक जताया जा रहा है कि जवाहिरी के काबुल में होने की जानकारी अमेरिका को तालिबान ने उपलब्ध कराई हो।  

दरअसल, कुछ महीने मे अफगानिस्तान के हालात आर्थिक तौर पर काफी बिगड़ गए है। तालिबान शासन को अभी तक कई देशों ने मान्यता भी नहीं दी है। अमेरिका ने अफगानिस्तान के सेंट्रल बैंक की राशि को भी फ्रीज कर दिया है। ऐसे में लगातार आर्थिक हालात बिगड़ रहे हैं। जिसको सुधारने के लिए यह संभव है कि तालिबान ने अलकायदा सरगना को बोझ मानते हुए अमेरिका को जवाहिरी के बारे में जानकारी दे दी हो। वहीं दूसरी ओर यह भी माना जा रहा है कि इस ऑपरेशन में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अमेरिका की मदद की है। दावा किया जा रहा है कि सीआईए को पहले से जवाहिरी के कराची में छिपे होने की जानकारी थी। इसके बाद इस साल की शुरुआत में जब जवाहिरी पाकिस्तान से काबुल पहुंचा तब अमेरिका के पास उसके परिवार की गतिविधियों की जानकारी पहुंची थी। जवाहिरी की मौत में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के हाथ से इनकार नहीं किया जा सकता।  

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जवाहिरी की मौत से एक दिन पहले पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने अमेरिका उप विदेश मंत्री वेंडी शरमन से बात की थी। माना जा रहा है कि बाजवा ने शरमन से फोन पर आईएमएफ बेलआउट पैकेज दिलाने में मदद की अपील भी की थी। बाजवा और शरमन की बातचीत के बाद पाकिस्तान के विपक्षी दलों ने आर्मी चीफ के सामने कई सवाल उठाए थे। पूर्व पीएम इमरान खान ने पूछा कि आखिर देश के सेना प्रमुख को दूसरे देश की उपविदेश मंत्री से क्यों बात करनी पड़ी? वह भी ऐसे समय में जब पाकिस्तान में एक सरकार और मंत्रीमंडल पहले से है।