Hiroshima Day: आज से 77 साल पहले आसमान से बरसी थी मौत,हिरोशिमा का तापमान पहुंचा था 4 हजार डिग्री

 
Hiroshima Day

आज से 77 साल पहले आसमान से मौत की बारिश हुई थी। मौत की बारिश करने वाला था अमेरिका। जिसने आज के दिन ही जापान के हिरोशिमा शहर पर विश्व का पहला परमाणु हमला किया था। परमाणु बम से हिरोशिमा का तापमान एक दम चार हजार डिग्री तक बढ़ गया था। इससे पूरा हिरोशिमा शहर पलभर में तबाह हो गया था। उसके बाद से अब जब कभी भी परमाणु हथियारों से लैस देशों के बीच जंग की आशंका होती है तो शांतिप्रेमियों की रूह कांपती है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है। ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका आमने-सामने हैं। ऐसे में आज हिरोशिमा दिवस को याद करना भी बहुत जरूरी हो गया है। 

छह अगस्त को दुनिया ‘हिरोशिमा दिवस’ के रूप में मनाती है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर परमाणु बम से हमला किया था। जापान उस समय ताकतवर था। 1939 में शुरू हुए विश्व युद्ध को छह साल हो चुके थे। लेकिन जंग रूकने का नाम नहीं ले रही थी। जापान लगातार अमेरिका पर हमले कर रहा था। इस पर अमेरिका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराकर उसको असह्य दर्द दे दिया था।  अमेरिका ने 6 अगस्त 1945 की सुबह 8 बजे हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया। धमाका होते ही 80 हजार से ज्यादा से अधिक लोगों की पल में मौत हो गई थी। बम से निकली चार हजार डिग्री के तापमान ने पूरे शहर का नामो निशान मिटा दिया। परमाणु हमले में सब कुछ जलकर नष्ट हो गया था। दो मिनट में शहर का 80 प्रतिशत इलाका आग में खाक हो गया। 29 किलोमीटर तक के आसमान से काली बारिश हुई। हजारों लोग परमाणु विकिरण की चपेट में आकर घुटघुट मारे गए। 

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इसके बाद भी अमेरिका नहीं रूका और उसने तीसरे दिन नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिरा दिया था। अमेरिका ने तीन दिन बाद ही यानी 9 अगस्त 1945 को सुबह 11 बजे नागासाकी पर बम गिरा दिया। वहां पर भी पलभर में 40 हजार लोगों की पल में मौत हो गई। परमाणु हमले के कई सालों बाद जापान के इन शहरों और इसके आसपास के शहरों में परमाणु विकिरण के कारण बच्चे भी अपंग पैदा होते रहे। आखिरकार भारी तबाही देख जापान को झुकना पड़ा और उसने अमेरिका के सामने आत्म समर्पण कर दिया। इसी के साथ ही दूसरा विश्व युद्ध भी खत्म हो गया। उसके बाद से जापान में हर साल हिरोशिमा और नागासाकी दिवस मनाया जाता है। जापान आज भी परमाणु हमले की वो भयावहता नहीं भूला है।