तालिबानी सरकार का फरमान : झूठी आलोचना करने पर मिलेगी मौत की सजा

 
Afghanistan Crisis

काबुल। अफगानिस्तान में तालिबानी सत्ता आने के बाद से प्रतिदिन कोई न कोई नए फरमान जारी किए जा रहे हैं। इस बार का मामला कुछ नया ही है। दरअसल इस समय तालिबान ने कहा कि बिना किसी प्रामाणिकता के 'इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान' विद्वानों और लोकसेवकों की आलोचना करने वालों को मृत्यु दंड तक से दंडित किया जा सकता है। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने अपने नेता मुल्ला हेबतुल्लाह अखुंदजादा द्वारा दिए निर्देशों को प्रकाशित किया है। जबीउल्लाह ने दिशा—निर्देशों को लोगों के लिए एक तरह की शरिया की जिम्मेदारी बताई है।

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तालिबान ने दिए गए दिशा—निर्देश में कहा कि अफगानिस्तान में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ  आरोपों और झूठी आलोचना करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। यहां तक उनको मृत्युदंड़ भी दिया जा सकता है। सुन्नी पश्तून समूह पर लंबे समय से मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। अक्सर लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं के अधिकारों पर आलोचना का सामना करना पड़ता है। इस तरह की आलोचना से परेशान तालिबान ने फिर से फरमान सुनाया है।
मानवाधिकार संगठनों और मीडिया की रिपोर्टों से पता चलता है कि तालिबान ने सोशल मीडिया पर आलोचना करने वाले लोगों को गिरफ्तार कर कैद किया और उनको प्रताड़ित किया है। रिपोर्ट के अनुसार अखुंदजादा के निर्देशों के तहत, ऐसे कार्यों को नकारात्मक प्रचार के रूप में अब समझा जाएगा। जो अनजाने में दुश्मनों की मदद का कारण बताया जा रहा है।