Pakistan: पाक में फैल रही है सांप्रदायिक हिंसा से शियाओं को खतरा

 
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करांची। पाकिस्तान में तेजी से सांप्रदायिक हिंसा फैल रही है। पाक में पनप रहे सुन्नी मुस्लिमों के दो गुटों देवबंदी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बरेलवियों का प्रतिनिधित्व करने वाले तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के कारण पूरा पाकिस्तान हिंसा की चपेट में है।  ब्रसेल्स आधारित इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप  के मुताबिक, वर्तमान राजनीतिक कटुता और आर्थिक तनाव के चलते इसके और अधिक बढ़ने की आशंका है। ‘पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा का एक नया युग’ शीर्षक नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि टीएलपी को हिंसा के इतिहास के बाद भी पाकिस्तान के चुनाव आयोग से राजनीतिक दल के रूप में मान्यता प्राप्त है। पाक में 2023 की गर्मियों में संभावित चुनाव के दौरान यह हिंसक दल राजनीतिक प्रभाव बढ़ा सकता है और मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के लिए खतरा भी बन सकता है। 

यह रिपोर्ट सुरक्षा विशेषज्ञों के इस पुराने निष्कर्ष पर पहुंचती है कि टीटीपी, टीएलपी और अन्य आतंकी गुट इस्लामिक स्टेट प्रोविंस ऑफ खुरासान की  शाखाएं हैं, जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान के जनजातीय इलाकों में तेजी से अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। ये दोनों ही गुट काफी अलग हैं और देश में सबसे अधिक खराब सांप्रदायिक खून-खराबे के जिम्मेदार माने जाते हैं। इनसे मुस्लिम अल्पसंख्यकों खासकर शियाओं को सबसे अधिक खतरा है। राजनीतिक लाभ लेने के लिए कभी किसी को भी ईशनिंदा का आरोप लगाकर उन्हें मौत के घाट उतारा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, सांप्रदायिक हिंसा बढ़ने के कारण से पूरे पाकिस्तान और क्षेत्र में घरेलू आतंकवाद भी जड़ें मजबूत कर रहा है। जिससे आने वाले समय में पड़ोसी देशों को भी खतरा हो सकता है।