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गुजरात में कांग्रेस के कार्यकारी प्रमुख हार्दिक पटेल (Hardik Patel) को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिले दो दिन भी नहीं बीते कि उन्होंने कांग्रेस के दिल्ली और प्रदेश नेतृत्व पर बहुत बड़ा और तीखा बयान जारी कर दिया। हार्दिक ने साफ़ तौर पर कहा कि शीर्ष नेतृत्व में निर्णय लेने की शक्ति का अभाव है, साथ ही उन्होंने यह भी एलान कर दिया किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में वह कौन सी सीट से मैदान में उतरने जा रहे हैं.
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दरअसल हार्दिक की नाराज़गी पाटीदार समाज का एक बड़ा नाम नरेश पटेल को लेकर पार्टी में मची कश्मकश को लेकर है. नरेश पटेल पाटीदार समाज के लेउवा समुदाय से आते हैं, गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में इस समुदाय की 60 प्रतिशत भागीदारी है और जो पारम्परिक तौर पर कांग्रेस का वोट बैंक हैं जबकि दूसरी ओर कड़वा पाटीदार समुदाय भाजपा के साथ है, नरेश पटेल एक ऐसा नाम हैं जो दोनों समुदायों पर मज़बूत पकड़ रखते हैं. नरेश पटेल इस समय ज़बरदस्त डिमांड में हैं, उनके पिता कांग्रेसी थे और उन्हें भी कांग्रेसी ही समझा जाता है, एक भी चुनाव न लड़ने वाले नरेश पटेल पर भाजपा और आम आदमी पार्टी भी डोरे डाल रही है.
प्रशांत किशोर ने गुजरात में कांग्रेस को लेकर जो रणनीति बनाई है, कहते हैं कि उसकी मुख्य भूमिका में नरेश पटेल ही हैं, हार्दिक पटेल की आज जो नाराज़गी फूटी उसकी वजह यही है कि समय पर निर्णय न ले पाने से नरेश पटेल कहीं भाजपा या आप के खेमे में न पहुँच जायँ जबकि गुजरात कांग्रेस के प्रमुख जगदीश ठाकोर का कहना है कि इस मामले में नरेश पटेल फैसला नहीं ले पा रहे हैं और जबतक वह फैसला नहीं लेंगे बात कैसे आगे बढ़ेगी।
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वैसे हार्दिक (Hardik Patel) के आरोप में काफी दम है और बार बार यह साबित हो चूका है कि समय पर निर्णय न लेने का खामियाज़ा कांग्रेस पार्टी भुगतती रही है, पंजाब का सिद्धू प्रकरण इसकी ताज़ा मिसाल है. पहले पीके और अब हार्दिक, नरेश पटेल पर फैसला लेने के लिए कांग्रेस को जल्दबाज़ी करनी चाहिए वरना हाथ मलने के सिवा कुछ नहीं मिलेगा।

