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अस्पतालों के लंबे सफर में खो गयी नवजात की जिंदगी


अस्पतालों के लंबे सफर में खो गयी नवजात की जिंदगी

हल्द्वानी। पहाड़ी क्षेत्रों में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए जाने के दावे उत्तराखंड सरकार और उनके मंत्रियों द्वारा समय-समय पर किए जाते हैं। मगर वास्तविकता यह है कि पहाड़ों में चिकित्सा सुविधाओं के अभाव के कारण नवजात शिशु दम तोड़ रहे हैं।

बेरीनाग क्षेत्र निवासी महिला को भी समय से उचित चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण नौ महीने से पेट में पल रहे बच्चे को खोना पड़ा। दो अस्पताल में इलाज न मिलने पर तीसरे अस्पताल तक पहुंचने के सफर में उसके बच्चे की जिंदगी कहीं पीछे छूट गयी। नौ महीने से दिन-रात बच्चे का मासूम चेहरा देखने की आस लगाये बैठी महिला अब अपने भाग्य को कोस रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बेरीनाग के समीप स्थित ग्राम पाखू में रहने वाली 22 वर्षीय हेमा गर्भवती थी और उसका नियमित तौर पर उपचार भी चल रहा था। नौ महीने की गर्भवती हेमा को प्रसव पीड़ा होने पर परिवारजनों ने स्थानीय चिकित्सालय में दिखाया, जहां से उसे अल्मोड़ा के लिए रेफर कर दिया गया।

ग्राम पाखू से अल्मोड़ा तक का सफर तय करने में हेमा की हालत काफी खराब हो गई। मगर उसकी परेशानी वहां पहुंचने पर भी खत्म नहीं हुई। अल्मोड़ा पहुंचने के बाद भी हेमा को उपयुक्त उपचार नहीं मिल पाया।

क्योंकि चिकित्सकों ने अल्मोड़ा अस्पताल में आईसीयू तथा अन्य सुविधाएं न होने की बात कहते हुए हेमा को हल्द्वानी के लिए रेफर कर दिया। प्रसव पीड़ा के असहनीय दर्द से चिल्लाती हेमा को लेकर चिंतित परिजन देर रात हल्द्वानी के महिला चिकित्सालय पहुंचे। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी और बच्चे ने मां के गर्भ में ही दम तोड़ दिया।

चिकित्सकों ने तुरंत ऑपरेशन कर मृत बच्चे को पेट से बाहर निकाल कर हेमा की जान बचाई।

हल्द्वानी महिला अस्पताल की सीएमएस डाॅ उषा जंगपांगी ने बताया कि समय पर उपचार न मिल पाने के कारण हेमा की स्थिति बहुत गंभीर हो गई थी। यदि हेमा को अस्पताल तक पहुंचने में और समय लग जाता तो बच्चे के साथ उसकी भी जान जा सकती थी। ऑपरेशन होने के कारण अभी हेमा को अस्पताल में ही भर्ती रखा गया है।

नौ महीने तक गर्भ में पाले बच्चे के जाने का गम हेमा के चेहरे से झलक रहा है। वहीं नौ महीने से बच्चे के आस लगाए हुए परिजनों ने भी निराश होकर कहा कि यदि हेमा को समय से चिकित्सा मिल जाती तो उसका बच्चा भी आज जीवित होता।

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