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आधी रात पेपर लीक पर बना नया कानून

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नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी NDA सरकार ने अभी संसद की किसी भी कार्रवाई का सामना नहीं किया है, अभी तो सांसदों को शपथ भी नहीं दिलाई गयी है, एक तरह से कह सकते हैं पक्ष और विपक्ष आधिकारिक तौर पर अभी एक्टिव भी नहीं हुए हैं लेकिन मोदी सरकार पेपर लीक विवादों में घिर गयी है जिससे परेशान होकर सरकार ने कल आधी रात पेपर लीक पर बड़ा कदम उठाते हुए नया कानून बनाते हुए उसे लागू भी कर दिया है जिसके तहत दोषी पाए व्यक्ति को 10 वर्ष का कारावास और एक करोड़ रूपये जुर्माना लगाया जा सकता है.

हालाँकि इसमें एक बड़ा पेंच ये है कि ये जो नया कानून बनाया गया है वो 21 जून 2024 के बाद के किसी भी पेपर लीक के मामले में लागू होगा। जिसका मतलब ये हुआ है कि NEET और NET पेपर लीक से जुड़े 33 लाख छात्रों के जीवन से जिन लोगों ने खिलवाड़ किया उनपर ये कानून लागू नहीं होगा, उन्हें 10 साल की सजा नहीं होगी और न ही एक करोड़ का जुर्माना लगेगा। बता दें कि पेपर लीक की इन घटनाओं का केंद्र गुजरात और बिहार है जहाँ से पेपर लीक के तार जुड़े हुए हैं और ये दोनों राज्य भाजपा शासित हैं, बिहार में भाजपा के सहयोग से नितीश सरकार चल रही. कल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक पत्रकार वार्ता में नैतिक रूप से खुद की ज़िम्मेदारी तो स्वीकार की लेकिन इस्तीफे जैसे कोई बात नहीं कही. यहाँ तक कि धर्मेंद्र प्रधान ने बिहार को तो नाम लिया लेकिन गुजरात पर चुप्पी साध गए जबकि NEET के मामले में सबसे पहला नाम गुजरात का आया था जहाँ के एक सेंटर से आधा दर्जन टॉपर आये थे और वहीँ से इस पूरे विवाद ने जन्म लिया था जो आज पूरे देश में चर्चा का विषय है और भाजपा सरकार के गले की फांस।

नए कानून के तहत अब जिन क्रियाओं को अपराध माना जायेगा उनमें किसी प्रतियोगी परीक्षा का पेपर और आंसर की लीक करना, बिना अनुमति के परीक्षा का पेपर और आंसर की अपने पास रखना, परीक्षा दे रहे अभ्यर्भी की मदद करना, परीक्षा के दौरान किसी से पेपर हल करने के लिए मदद लेना, OMR शीट के साथ छेड़छाड़ करना, सरकारी एजेंसी द्वारा तय मानकों का उल्लंघन करना, किसी Exam centre या उसके system से छेड़छाड़ करना, नकली Admit Card जारी करना और गलत तरीके से Exam करवाना, काॅपियों की जांच के दौरान छेड़छाड़ करना और Exam Centres पर तैनात अथाॅरिटी को धमकाना शामिल है.

नए कानून के तहत अब आंसर सीट के साथ छेड़छाड़ करने को कम से कम 3 साल और अधिकतम 5 साल की जेल हो सकती है इसके अलावा 10 लाख से लेकर 1 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है. वहीँ अगर सर्विस प्रोवाइडर दोषी पाया जाता है तो उस पर 1 करोड़ का जुर्माना। एग्जाम सेंटर की भूमिका मिलने पर उस एग्जाम सेंटर को 4 वर्षों के लिए सस्पेंड कर दिया जायेगा. नए कानून के दायरे में यूपीएएसी, एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड, आईबीपीएस और एनटीए की परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ी आएगी। इसके अलावा पेपर लीक से जुड़े सभी अपराध गैर जमानती होंगे, दोषियों की सम्पत्तियाँ भी कुर्क हो सकती हैं, परीक्षा की लागत पेपर लीक के आरोपियों से वसूली जाएगी।

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