लखनऊ। चाचा शिवपाल यादव का राजनैतिक राह अब नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। भतीजे टीपू यानी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का मोह छोड़कर शिवपाल राम भक्ति की ओर अग्रसर हो चुके हैं। इसके लिए उन्होंने बकायदा अपने टवीटर एकाउंट में भी जिक्र किया है। कभी समाजवादी रहे और उसके बाद अपनी नई पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया का गठन करने के बाद से ही शिवपाल के राजनैतिक दिन बहुत बुरी तरह से बीत रहे हैं। भतीजे टीपू यानी पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव को सपा से तो मक्खी की तरह निकालकर फेंका ही। अब 2022 के विधानसभा चुनाव हरने के बाद से शिवपाल की हालत और बुरी कर दी है। जिसका नतीजा है कि शिवपाल अपने राजनैतिक भविष्य को बचाने के लिए अब भाजपा की छाया तलाश रहे हैं। यहीं कारण है कि कभी खाटी समाजवादी का चोला ओढ़ने वाले शिवपाल आज भाजपा नेताओं के ट्विटर फालो कर रहे हैं। शिवपाल यादव ने अपने ट्विटर हैंडल का कवर पेज भी बदल दिया।
अखिलेश से तनानती के बीच कई बार सपा सरंक्षक मुलायम सिंह यादव के हस्तक्षेप के बाद शिवपाल यादव ने कभी राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा नहीं खोला और न अपनी राह बदली थी। इतना ही नहीं सपा से छोटे दलों के गठबंधन के साथ चुनाव में उतरने की योजना के तहत शिवपाल यादव ने सपा से गठबंधन कर चुनाव लड़ा। उसके बाद से माना जा रहा था अखिलेश और शिवपाल में अब संबंध अच्छे हो गए हैं। लेकिन अखिलेश यादव ने शिवपाला को समाजवादी पार्टी विधायक दल की बैठक में नहीं बुलाकर एक और झटका दिया तो उन्होंने राजनैतिक विकल्प चुनने का मन बना ही लिया। शिवपाल ट्विटर पर पीएम नरेन्द्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ को फालो कर रहे हैं। अब उन्होंने अयोध्या जाकर श्रीराम के दर्शन की इच्छा जताई है। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव परिवार से सियासत की एक नई धारा निकलने वाली है। शिवपाल की राहें भतीजे अखिलेश यादव से जुदा होने वाली हैं। सियासी मजबूरी ने खून—परिवार के रिश्तों को बेगाना कर दिया। शिवपाल सिंह यादव ने अपने ट्विटर का कवर पेज बदल कर इस सियासी बदलाव का आगाज भी कर दिया है।
