नई दिल्ली। भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज कहा कहना है कि भारतीय क्रिकेट टीम में भाई-भतीजावाद को पूरी तरह से नकार दिया गया है. लेकिन घरेलू क्रिकेट में वंशवाद को साफ तौर पर देखा गया है. उन्होंने सुनील गवास्कर के बेटे रोहन और सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय क्रिकेट में उच्च स्तर पर वंशवाद नहीं है. आईपीएल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कोई किसी को आईपीएल अनुबंध इसलिए नहीं देता, क्योंकि वो किसी का बेटा है, या भतीजा है.
ज्यादा नहीं खेल सके रोहन
आकाश ने कहा कि सुनील गावस्कर के बेटे रोहन को ज्यादा क्रिकेट खेलनी चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वह भारत के लिए खेले क्योंकि वो बंगाल के लिए लगातार अच्छा कर रहे थे. एक समय तो रोहन मुंबई की रणजी टीम का हिस्सा भी नहीं थे. जबकि उनके नाम के पीछे गावस्कर लगा था. रोहन ने भारत के लिए 11 वनडे मैच खेले जिसमें उन्होंने 151 रन बनाए. आकाश ने कहा, आप यही बात अर्जुन के बारे में कह सकते हो क्योंकि वह सचिन के बेटे हैं, अंडर-19 में भी कोई फालतू का चयन नहीं हुआ था. जब भी चयन होता है तो यह प्रदर्शन के आधार पर होता है.
राज्यों में दिखा वंशवाद
आकाश ने कहा कि मैंने ऐसा राज्य की टीमों में होते हुए देखा है जहां एक खिलाड़ी लंबे समय तक कप्तान रहा था. वह एक प्रशासक का बेटा था, न कि किसी खिलाड़ी का. वह बहुत अच्छा खिलाड़ी भी नहीं था और उसके आंकड़े भी इस बात को बता देते हैं. लेकिन उच्च स्तर पर, ऐसा कभी नहीं होता.

