Jamiat Ulema-E-Hind Deoband: आपके सीने पे हिंदुस्तान होना चाहिए: नवाज़ देवबंदी

उत्तर प्रदेशJamiat Ulema-E-Hind Deoband: आपके सीने पे हिंदुस्तान होना चाहिए: नवाज़ देवबंदी

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देवबंद से विशेष 

Jamiat Ulema-E-Hind Deoband: देश में मुस्लिम इबादतगाहों को मंदिर साबित करने के बढ़ते विवादों और उनसे बढ़ रहे धार्मिक तनाव के बीच आज देवबंद में जमीयत उलेमा-ए-हिंद (महमूद मदनी गुट) का दो दिवसीय सम्मलेन शुरू हुआ, सम्मेलन में पूरे देश के हज़ारों उलेमाओं और मुस्लिम बुद्धिजीवियों की वहां पर मौजूदगी हुई, सुबह से शुरू हुआ सम्मलेन का पहला दौर दोपहर 1 बजे तक चला जिसमें बहुत से उलेमाओं और दुसरे लोगों का सम्बोधन हुआ। इस अवसर पर मशहूर शायर नवाज़ देवबंदी को बोलने का मौका मिला और उन्होंने इस मौके भरपूर फायदा उठाते हुए राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का शानदार सन्देश दिया।

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नवाज़ देवबंदी ने इस मौके पर अपने दोस्त संजय का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं में दीवाली के त्यौहार पर बर्तन खरीदे जाते हैं, संजय भी बर्तन खरीदते हैं लेकिन एक घर के लिए नहीं बल्कि दो घरों के लिए, एक अपने घर के लिए और दूसरे नवाज़ भाई के घर के लिए. नवाज़ देवबंदी बात को आगे बढ़ाते हैं कि मेरे तीन बेटे हैं और संजय के दो बेटे। ईद के मौके पर मैं तीन बेटों के लिए नहीं बल्कि पांच बेटों के कपड़े  खरीदता हूँ, तीन अपने बेटों के लिए और दो संजय के बेटों के लिए और यह कपड़े संजय के घर मैं नहीं लेकर जाता बल्कि अपने बेटों के हाथ भेजता हूँ ताकि नयी पीढ़ी में यह मोहब्बत का सिलसिला चलता रहे। मोहब्बत समाज की सबसे बड़ी ज़रुरत है, नफरत के साथ दो लम्हे भी आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

दो समुदायों में बढ़ती हुई दूरियों को कैसे कम किया जा सकता है इस बात को उनकी दो पंक्तियों से समझा जा सकता है:-  

ये दुनिया दो किनारों को कभी मिलने नहीं देती| 
चलो दोनों किसी दरिया पे मिलकर पुल बनाते हैं ||

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डॉक्टर नवाज़ देवबंदी इंसानियत और देशप्रेम का मतलब समझाते हुए चार पंक्तियाँ पेश करके अपनी बात ख़त्म की 

रौशनी का कुछ न कुछ इमकान होना चाहिए| 
बंद कमरे में भी रौशनदान होना चाहिए|| 
वो जो अनपढ़ हैं चलो हैवान हैं तो ठीक है|  
हम पढ़े लिखों को तो इंसान होना चाहिए||   
हिन्दू मुस्लिम चाहे जो लिखा हो माथे पर मगर|  
आपके सीने पे हिन्दुस्तान होना चाहिए||

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