नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने संरक्षण गृहों में रखी वयस्क महिलाओं की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए देश के सभी राज्य सरकारों से अदालत द्वारा नियुक्त समिति की सिफारिशों के अनुरूप सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया। इन महिलाओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध अनैतिक दुर्व्यवहार निवारण अधिनियम (आइटीपीए) के तहत बनाए गए संरक्षण गृहों में रखा है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने ये निर्देश दिए है। शीर्ष अदालत ने समिति की कुछ सिफारिशों को इस वर्ष 19 मई को स्वीकार किया था। समिति की एक सिफारिश सर्वेक्षण को लेकर थी। जिससे संबंधित महिलाओं के मामलों की समीक्षा कर समयबद्ध तरीके से रिहाई सुनिश्चित कराई जा सके। अदालत ने राज्य सरकारों से सर्वेक्षण कराकर आज तारीख से 12 हफ्ते के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
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अदालत ने कहा है कि संबंधित राज्य सरकारों द्वारा संबंधित विभाग के सचिव द्वारा दायर हलफनामे के आधार पर रिपोर्ट पेश की जाए। प्रतिवादी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने कहा कि अदालत के निर्देशानुसार राज्य सरकारों द्वारा सर्वेक्षण नहीं किया गया। प्रतिवादी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने बताया कि कोर्ट के निर्देशानुसार राज्य सरकारों द्वारा सर्वेक्षण नहीं किया है। इससे पहले, कोर्ट द्वारा नियुक्त पैनल ने एक सहित विभिन्न दिशानिर्देशों की सिफारिश की थी। जब भी किसी वेश्यालय पर छापा पड़ता है। क्योंकि वहाँ स्वैच्छिक यौन कार्य अवैध नहीं है और केवल वेश्यालय चलाना गैरकानूनी है। संबंधित यौनकर्मियों को गिरफ्तार या दंडित और परेशान नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन भारत सरकार ने पैनल द्वारा की गई सिफारिशों के संबंध में कुछ आपत्तियां उठाईं हैं। जिसमें स्वैच्छिक यौन कार्य अवैध नहीं और केवल वेश्यालय चलाना गैरकानूनी है। यौनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना है।

