Supreme Court : हर महिला को गर्भपात का अधिकार, शीर्ष अदालत का ऐतिहासिक फैसला

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सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारों को लेकर आज एक ऐतिहासिक फैसला दिया है. सुप्रेनेः कोर्ट के इस फैसले के मुताबिक विवाहित या अविवाहित सभी महिलाओं को गर्भपात का अधिकार है, सभी महिलाओं को 24 सप्ताह तक के नियमों के तहत सुरक्षित और कानूनी गर्भपात की हकदार है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट  ने गर्भपात के लिए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट (MPT)के तहत पति द्वारा यौन हमले को भी मेरिटल रेप के अर्थ में शामिल किये जाने का आदेश दिया है.  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि MTP कानून में  विवाहित और अविवाहित महिला के बीच का अंतर संवैधानिक रूप से टिकाऊ नहीं है.  यह इस रूढ़िवादिता को स्थापित करता है कि केवल शादीशुदा महिलाएं ही यौन गतिविधियों में लिप्त होती हैं. किसी महिला का मैरिटल स्टेटस उसे अनचाहे गर्भ को गिराने के अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं हो सकती. यहां तक ​​कि अविवाहित और अकेली महिला को भी MPT एक्ट के तहत गर्भावस्था के 24 सप्ताह तक के नियमों के तहत गर्भपात का अधिकार है. अब यह अधिकार उन महिलाओं भी मिलेगा जो अपने अवांछित गर्भधारण को जारी रखने के लिए मजबूर हैं.

बता दें कि शीर्ष अदालत की बेंच 25 वर्षीय अविवाहित महिला की एक याचिका पर विचार कर रही थी जिसमें मांग की गयी थी कि 24 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त किया जाय, अविवाहित महिला ने शीर्ष अदालत को अवगत कराया कि उसके माता-पिता किसान हैं, वह 5 भाई-बहनों में सबसे बड़ी है . याचिकाकर्ता ने कहा कि कमाई के साधन के अभाव में वह बच्चे का पालन-पोषण करने में असमर्थ होगी. 21 जुलाई, 2022 के एक विस्तृत आदेश में सुप्रीम कोर्ट  ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर MPT एक्ट के प्रासंगिक प्रावधान की व्याख्या पर  ASG ऐश्वर्या भाटी की मदद मांगी थी. हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को एबॉर्शन की इजाजत देने से ये कहते हुए इनकार कर दिया था कि वो अविवाहित महिलाएं जिनकी गर्भावस्था एक सहमति के सेक्स से उत्पन्न होती है, MPT  रूल्स, 2003 के तहत किसी भी खंड द्वारा पूरी तरह से कवर नहीं की जाती हैं. 

बता दें कि देश में महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा की लगातार घटनाएं हती हैं. सरकारी आंकड़ों में अनुसार 4 में से 3 महिलाओं के लिए उनके पति ही दुश्मन साबित हुए. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 (2019-21) के अनुसार 18 से 49 आयु वर्ग की 83 प्रतिशत विवाहित महिलाओं को यौन हिंसा मामलों में पति ही दोषी निकले, वहीँ 13.7 फीसदी मामलों में पूर्व पति अपराधी साबित हुए. इसके अलावा 1.6 फीसदी मामलों में ब्वॉयफ्रेंड या पूर्व ब्वॉयफ्रेंड ज़िम्मेदार निकले।

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