शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन एसोसिएशन के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग लेकर वापस लौट आए हैं। सम्मेलन में एक ही हॉल की छत के नीचे भारत के पीएम मोदी और दो पड़ोसी देश के राष्ट्राध्यक्ष भी मौजूद रहे। हॉल में, एक छत के नीचे राषट्राध्यक्षों के साथ पीएम मोदी मौजूद तो रहे लेकिन रिश्तों में जमी बर्फ नहीं पिघली। रिश्तों के तनाव में किसी प्रकार की कमी नहीं आई। आमने−सामने रहकर न आंखें मिलीं, न हाथ मिले। न किसी ने एक दूसरे को नमस्ते किया और ना सुप्रभात। एक संगठन के एक छत के नीचे हुए इस कार्यक्रम में संगठन के आठ सदस्य देशों में से तीन सदस्य देशों का अपरिचित बने रहना, ये बताता है कि तीनों देशों में आपस में दूरी बहुत है। रिश्ते बहुत खराब हो चुके हैं। चीन और पाकिस्तान से दूरी बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भारत बदल गया है। वह दूसरे देश से दबकर नहीं बल्कि नजर से नजर मिलाकर बात करता है।
उज़्बेकिस्तान के समरकंद में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन एसोसिएशन का दो दिवसीय शिखर सम्मेलन बुलाया गया था। शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन एसोसिएशन (एससीओ) एक आठ सदस्यीय देशों का सुरक्षा समूह है। इसमें भारत, रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजीकिस्तान और पाकिस्तान शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें भाग लेने के लिये समरकंद पहुंचे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जब शंघाई सहयोग संगठन के मंच पर दिखे तो दोनों के बीच दूरियां साफ दिखी। सम्मेलन के फोटो सत्र में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक छोर पर थे तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ दूसरे छोर पर जबकि चीन राष्ट्रपति और मोदी के बीच में शंघाई सहयोग संगठन के चार सदस्य मौजूद थे। गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच 2020 में झड़प के बाद पहला मौका था, जब भारत प्रधानमंत्री और चीन राष्ट्रपति एक मंच पर आमने-सामने थे। लेकिन एक छत के नीचे की नजदीकी दोनों के दिलों की दूरियां नहीं मिटा सकी। दोनों नेता औपचारिक मुलाकात से बचते दिखाई दिए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मेलन में पहुंचने पर उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने गर्मजोशी से स्वागत किया था। भारत के प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने खुद उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला अरिपोव एयरपोर्ट पहुंचे थे। इसके साथ भारतीय प्रतिनिधिमंडल के स्वागत में बॉलीवुड संगीत बजाया गया। उज्बेकिस्तान में भारत का जोरदार स्वागत दूसरे दिन भी जारी रहा। जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे तो उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उस समय भी गर्मजोशी से स्वागत किया। सम्मेलन की बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों को संबोधित किया था।
कार्यक्रम के दौरान पूरे समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंदी में बोले। वह अंग्रेजी में बोल सकते थे, किंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया। सम्मेलन की बैठक के बाद पीएम मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों को पांच बड़े मंत्र दिए। दुनिया के महाबली देशों के मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत कैसे हर क्षेत्र में मजबूती से अपने पांव जमा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। स्टार्टअप वाला भारत इनोवेशन में सभी की सहायता करेगा। एससीओ के देशों के बीच सप्लाई चेन, ट्रांजिट बढ़ाना होगा, मोटे अनाज उपजाकर खाद्य संकट से निपटना होगा।
प्रधानमंत्री मोदी और चीन राष्ट्रपति शी जिनपिंग सम्मेलन में एक जगह, एक हॉल में तो मौजूद थे, लेकिन दोनों के बीच किसी प्रकार की कोई बातचीत नहीं हुई। लेकिन शिखर सम्मेलन में जिनपिंग ने भारत की मेजबानी का समर्थन किया। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत को अगले साल एससीओ की मेजबानी करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि अगले साल भारत की अध्यक्षता का समर्थन करेंगे। उज्बेकिस्तान ने आठ सदस्यीय शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की अध्यक्षता भारत को सौंपी।
चीन के राष्ट्रपति को नजरअंदाज कर भारत ने चीन को संदेश दिया कि पूर्वी लद्दाख से जुड़े वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर विवाद खत्म करने के लिए चीन को हालात सामान्य करने होंगे। लद्दाख सीमा के छोटे से भाग से सेना हटाने से द्विपक्षीय संबंध मधुर नहीं होंगे। चीन के सेना हटाने के बाद पीएम मोदी न सिर्फ जी-20 सम्मेलन में चीन गये थे, बल्कि जिनिपिंग के साथ अलग से द्विपक्षीय वार्ता की थी। लेकिन इस बार उसका यह दांव नहीं चला। एससीओ बैठक से पहले चीन ने पुराना दांव चल कर भारत को साधने की कोशिश की। सूत्र कहते हैं कि एलएसी के कुछ इलाकों से सेना हटाने के बाद चीन को उम्मीद थी कि वह भारत को साधने में कामयाब हो जाएगा। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चीन ने अपनी ओर से मोदी-जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता की तैयारी की थी। चूंकि पीएम को चीनी राष्ट्रपति से नहीं मिलना था, इसलिए वह इस सम्मेलन में देरी से पहुंचे। साथ ही उन्होंने चीन के राष्ट्रपति को नजरअंदाज कर नाराजगी स्पष्ट कर दी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यवहार ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक चीन नहीं सुधरेगा, भारत अपना रवैया नहीं बदलेगा।

