नई दिल्ली। आज भी भारतीय युवा पीढ़ी दुकान पर कंडोम खरीदने में झिझक महसूस करती है। ऐसे में असुरक्षित यौन संबंध बनाना काफी नुकसानदेह साबित होता है। लेकिन अब जो नई पीढ़ी बड़ी हो रही है उनको दुकान पर जाकर कंडोम खरीदने में किसी प्रकार की कोई झिझक या संकोच नहीं है। लेकिन कंडोम खरीदने में भी काफी सावधानी बरतनी चाहिए। नहीं तो इसमें भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और अनचाही प्रेग्नेंसी भी हो सकती है। ये जरूरी है कि कंडोम का उपयोग से पहले यह जान लेना चाहिए कि कौन सा कंडोम सही होगा।
सही साइज का कंडोम नहीं लेने पर फटने या फिर स्लिप होने की आशंका बनी रहती है। ऐसा न हो, इसलिए जरूरी है कि साइज के अनुसार इसका चुनाव करना चाहिए। जिस कंपनी का कंडोम लें, उसके बारे में एक बार जान समझ लें जिससे कि समझा जा सके कि उनके लेबल में साइज लिखा है या नहीं।
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आमतौर पर कंडोम लैटेक्स से बनते हैं। इसके बारे में लोगों को जागरूकता कम होती है। कम लोग ही जानते हैं कि ये मटीरियल एलर्जी भी कर सकता है। ऐसे लोग जिनको लैटेक्स से एलर्जी होती है वो नान लैटेक्स कंडोम खरीद सकते हैं।
कंडोम की मोटाई अलग—अलग होती है। प्लेजर के एंगल से किस तरह की मोटाई चाहिए। इसे अपने हिसाब से चुना जा सकता है। पिछले कुछ समय अल्ट्राथिन कंडोम की मांग तेजी से बढ़ी है। ऐसे में इस तरह के विकल्प को चुना जा सकता है।
कंडोम साधारण से लेकर टेक्सचर्ड आउटर लेयर वाले आते हैं। साथी के लिए यह पहली बार का अनुभव है तो प्लेन कंडोम बेहतर विकल्प है। जिससे वह और ज्यादा असहज महसूस नहीं कर सके। वहीं अगर थोड़ा सा फन जोड़ने वाला चाहिए तो टेक्सचर्ड फिनिशिंग वाला कंडोम सलेक्ट कर सकते हैं।

