(निरूक्त भार्गव)
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान निश्चित रूप से महाकाल महाराज के परम भक्त हैं और इसीलिए उन्हें उज्जैन से अत्याधिक लगाव है। सिंहस्थ महापर्व-2016 की मेज़बानी में उन्होंने कोई कसर नहीं रख छोड़ी थी। खुद कई-कई दिन और लगातार उज्जैन में बने रहे, पूरी मेला अवधि में। इतना ही नहीं, जब महाकुंभ में सब कुछ तबाह हो रहा था आसमानी आफत के चलते, तो अपने कुटुंब में हुई गमी को भी भुलाकर वे खुद सिंहस्थ क्षेत्र में लोगों को चाय पिला रहे थे।
कहते हैं शिवराज के राज में निर्माण और विकास कार्यों की ‘करनी’ (औजार) थमती नहीं है! और इसे ना सिर्फ उज्जैनवासी, बल्कि समूचे मध्यप्रदेशवासी भी स्वीकारते हैं! करोड़ों रुपए की लागत वाले “महाकाल सृष्टि द्वार” का निर्माण उसी श्रृंखला का महत्वपूर्ण विस्तार है! इसे उन्हीं की दूरदृष्टि का परिणाम कहा जा सकता है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्टूबर को उज्जैन आकर उक्त सौगात महाकाल जी के भक्तों और उज्जैनवासियों
को समर्पित करेंगे!
लोकार्पण समारोह को जन-जन से जोड़ने और इसे यादगार भव्यता देने के लिए मुख्यमंत्री जी और उनकी टीम निरंतर सक्रिय है। शिवराज जी ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए अपनी कैबिनेट की बैठक 27 सितंबर (मंगलवार) को उज्जैन में आहूत कर ली है। पहले की तरह इस बैठक को भोपाल में ही होना था, मगर मुख्यमंत्री ने उज्जैन को महत्व प्रदान किया। वल्लभ भवन की बजाय पूरी सरकार (मंत्री/आला अफसर) उज्जैन के नवनिर्मित प्रशासनिक संकुल में दोपहर 12:30 बजे बैठक करेंगे! भारतवर्ष के इतिहास में ये पहली बार होने जा रहा है, उज्जैन में!
भोलेनाथ बाबा महाकाल की कृपा सब पर रहती है, लेकिन शिवराजसिंह चौहान ने मानों उसे अक्षुण्ण बना लिया है! कहना जरूरी है कि वो उज्जैन पर इतने मेहरबान हैं, तो बाबा के आर्शीवाद से ही!

