राष्ट्रीय मैमोग्राफी दिवस: बचाव का सबसे अच्छा तरीका है जल्द पहचान

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राष्ट्रीय मैमोग्राफी दिवस: बचाव का सबसे अच्छा तरीका है जल्द पहचान

  • ब्रेस्ट इमेजिंग सोसाइटी, इंडिया द्वारा नियमित जांच और जल्द पहचान के बारे में जागरूकता पैदा करने की एक पहल

नई दिल्ली: ब्रेस्ट इमेजिंग सोसाइटी, इंडिया (बीआईएसआई) ने दिल्ली के एम्स में आयोजित एक आभासी सम्मेलन के माध्यम से 30 अक्टूबर को भारत में राष्ट्रीय मैमोग्राफी दिवस के रूप में मनाने की गर्व के साथ घोषणा की। यह अंतर्राष्ट्रीय स्तन कैंसर जागरूकता माह को मनाने और इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने, नियमित जांच और जल्दी पता लगाने के लिए एक पहल है। 2018 में, स्तन कैंसर के आंकड़ों पर एक रिपोर्ट में 1,62,468 नए पंजीकृत मामले और 87,090 लाख मौत का जिक्र किया गया था। कैंसर के चरण बढने के साथ– साथ जीवित रहने की संभावना कम होती जाती है, और इसकी पहचान के आधार पर यह पाया गया कि 50% से अधिक भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के तीसरे और चौथे चरण में इस बीमारी का पता चलता है। भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर से ग्रस्त होने के बाद उनके जीवित रहने की दर 60% पायी गयी है जो कि अमरीका में 80% है और अमरीकी महिलाओं की तुलना में भारतीय महिलाओं में जीवित रहने की दर 20% कम है।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात अतिथियों और ब्रेस्ट इमेजिंग सोसाइटी, इंडिया (बीआईएसआई) के सदस्यों ने की जिनमें बीआईएसआई के अध्यक्ष डॉ एन खंडेलवाल, बीआईएसआई की महासचिव डॉ ज्योति अरोड़ा, बीआईएसआई के संस्थापक अध्यक्ष डॉ कर्नल पंत के साथ-साथ मुंबई से डॉ बिजल झंकारिया, एसजीआरआई की सीनियर कंसल्टेंट डॉ माधवी चंद्रा और एम्स में रेडियोलॉजी में प्रोफेसर डॉ स्मृति और किम्स हैदराबाद से डॉ ज्वाला श्रीकला शामिल थे।

उपस्थित अतिथियों को संबोधित करते हुए बीआईएसआई के अध्यक्ष डॉ एन खंडेलवाल ने कहा, “ब्रेस्ट इमेजिंग सोसायटी, इंडिया के इतिहास में 30 अक्टूबर को राष्ट्रीय मैमोग्राफी दिवस के रूप में घोषित करने के कारण यह एक बड़ा दिन है। ऐसा करने का विचार हमारे देश में जानलेवा बीमारी स्तन कैंसर की जल्द पहचान के लिए नियमित स्तन जांच के लिए जागरूकता पैदा करना है।

बीआईएसआई की महासचिव डॉ ज्योति अरोड़ा ने कहा, “मुझे बीआईएसआई प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रीय मैमोग्राफी दिवस के शुभारंभ के अवसर पर उपस्थित होने का सौभाग्य मिला है। हर किसी के समर्थन के साथ, हम हर महिला को अहसास करा सकते हैं कि उसका जीवन महत्वपूर्ण है। एक साथ काम करके, हम उसे प्रेरित कर सकते हैं और उसमें उम्मीद पैदा कर सकते हैं कि उसे इस घातक कैंसर से अपने स्तन खोने की जरूरत नहीं है, बल्कि वह कैंसर का जल्दी पता लगाकर और मैमोग्राफी से नियमित जांच कराकर इसे हरा सकती है। राष्ट्रीय मैमोग्राफी दिवस उसके स्वस्थ भविष्य की दिशा में यह एक छोटा कदम उठाने के लिए उसके लिए एक रिमाइंडर होगा। ”

एम्स में दीप प्रज्वलन समारोह के दौरान रेडियोलॉजी की प्रोफेसर डॉ स्मृति हरि ने कहा कि “यह दिवस मैमोग्राफी के बारे में जागरूकता पैदा करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और आगे चलकर केवल इस दिन नहीं बल्कि हम सालों भर मैमोग्राफी शिविर, वार्ता, सत्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जागरूकता बढाने की योजना भी बनाएंगे।”।

इस अवसर पर उपस्थित एसजीआरआई, नई दिल्ली की डॉ माधवी चंद्रा ने कहा कि “स्तन कैंसर भारत में महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण है और कोविड– 19 महामारी उस तथ्य को नहीं बदल सकती है। 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे कैंसर का जल्द पता लगाने और जीवन को बचाने के लिए, साल में एक बार अपना मैमोग्राम अवश्य कराएं। आज, 30 अक्टूबर को ब्रेस्ट इमेजिंग सोसाइटी, इंडिया द्वारा “राष्ट्रीय मैमोग्राफी दिवस” के रूप में मनाया जा रहा है, ताकि इस महत्वपूर्ण संदेश को घर– घर तक पहुंचाया जा सके कि विलंब न करें, आज ही मेमोग्राम कराएं। ”

इस आभासी मंच के माध्यम से डॉक्टरों ने इसके कारणों के बारे में चर्चा करने के लिए वैज्ञानिक सत्र भी आयोजित किये।

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