नशे का इलाज करने वाले बना रहे नशेड़ी

मेरठ रीजननशे का इलाज करने वाले बना रहे नशेड़ी

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नशे का इलाज करने वाले बना रहे नशेड़ी

  • पीएल शर्मा जिला अस्पताल में खुलेआम चल रहा नशे का कारोबार
  • मुफ्त में मिलने वाली सरकारी गोली 140 रूपये तक में बिक रही

मेरठ। लोगों को नशे की लत से छुटकारा दिलाने के लिये प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल में बनाया गया ओरल सब्सटीट्यूशन थेरेपी सेंटर अब लोगों को नशे का शिकार बना रहा है। मुफ्त में मिलने वाले सरकारी गोलियां जो लोगों को नशा छुड़ाने के लिये दी जाती हैं वह अस्पताल परिसर में ही 140 रूपये तक में खुलेआम बेची जा रही है।

एक ओर जहां मरीजों को उनकी लत के मुताबिक निर्धारित मात्रा में गोलियां दी जाती हैं वहीं मुंहमांगे दाम देने पर अस्पताल में मौजूद कथित कर्मचारी पांच सौ गोलियां भी उपलब्ध कराने का दावा करते हैं। सेंटर के बाहर मिलने वाली गोलियां लेकर अस्पताल के पार्कों में बैठ कर लोग नशे की गोलियों का सेवन करते हंै। लोगों को नशेड़ी बनाने का खेल खुलेआम चल रहा है और मुफ्त में मिलने वाली गोलियों को बेच मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है। मगर अस्पताल प्रबंधन अपनी नाक के नीचे चल रहे इस गोरखधंधे की जानकारी न होने और जांच कराने की बात कह पल्ला झाड़ रहा है।

प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल का ओरल सब्सटीट्यूशन थेरेपी सेंटर नशेड़ियों को नशे की गोलियां सप्लाई करने का अड्डा बन गया है। यहां लोगों को नशे की लत से छुटकारा दिलाने के लिये बुप्रेनोरफिन या बुप्रेनोर दवा दी जाती है। नियमानुसार इन दवाओं को सेंटर के भीतर ही पीस कर खाना होता है। मगर मरीज इन दवाओं को सेंटर से बाहर ले आते हैं और नशे का कारोबार करने वालों को बेच देते हैं। इन दवाओं को जिन्हें नशा करने वाले सफेद गोली कहते हैं को 30 से लेकर 140 रूपये तक मेें बेच दिया जाता है। यह काम जिला अस्पताल में बने सेंटर का कर्मचारी बताने वाले लोग करते हैं।

सूत्रों के अनुसार इस सेंटर पर फर्जी मरीजों का लेखा-जोखा भी दर्ज है और उनके नाम पर दवाएं भी दी जाती हैं। प्रतिदिन यह फर्जी मरीज सेंटर आते हैं और अपने कोटे की सफेद गोलियां लेकर बाहर खड़े दलालों को बेच देते हैं। इस कारोबार का खुलासा होने के बाद सेंटर प्रबंधन ने इस मामले में अपने कर्मचारियों के शामिल होने की बात से साफ इंकार करते हुए शक की सुईं वहां सहयोग करने वाली एनजीओ की ओर घुमा दी। अब सच क्या है यह तो जांच से ही पता चलेगा लेकिन जिस सेंटर पर, जिन लोगों पर लोगों की नशे की लत छुड़ाने की जिम्मेदारी हो वहीं लोगों को नशे की आदत डाल रहा हो तो सवाल उठना लाजमी है। मुफ्त में मिलने वाली सरकारी गोली 140 रूपये तक में बेची जा रही हो तो इस गोरखधंधे में छिपा मुनाफा भी सामने आ जाता है। जहां मरीजों को निर्धारित संख्या में गोलियां दी जाती हों मगर दाम देने पर पांच सौ गोलियां तक दिलाने का दावा करने वाले मौजूद हों तो इस मामले में सेंटर की संलिप्तता भी जाहिर हो जाती है। मगर इतना बड़ा खेल जिसकी नाक के नीचे हो रहा हो वही इस मामले की जानकारी होने से भी इंकार कर दे तो इस बात पर विश्वास होना मुश्किल है।

स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है लंबे समय तक गोलियों का सेवन
बुप्रेनोरफिन या बुप्रेनोर एंटी डिप्रेशन टेबलेट होती हैं। इन दवाओं का लेने की सलाह चिकित्सक शराब, इंजेक्शन आदि के नशे को छुड़ाने के लिये देते हैं। इन दवाओें को लेने की मात्रा भी मरीज के नशे का स्तर, उसका स्वास्थ्य आदि की जांच के बाद तय की जाती है। इन गोलियों के जरिये पहले नशा छुड़ाया जाता है और फिर धीरे-धीरे कर इन गोलियों की मात्रा कम की जाती है। लेकिन नशे के आदि लोग इन गोलियों का सेवन नशा करने के लिये करने लगते हैं।

लंबें समय तक इन दवाओं का सेवन करना स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होता है। इससे लीवर में सूजन आना, पेट का अल्सर होना और नर्वस सिस्टम का प्रभावित होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन दवाओं को बिना डाॅक्टर के पर्चे के किसी व्यक्ति को नहीं दिया जाता। मगर जिला अस्पताल में आपकी जेब भारी होनी चाहिये गोलियां चाहे जितनी ले लिजिये।

नशे के खेल में डीएम ने बिठाई जांच
इस गंभीर मामले में मेरठ के डीएम के बालाजी ने जांच बैठा दी है। माना जा रहा है कि इस प्रकरण में कई कर्मचारियों पर शक की सुईं उठ रही है। लोेगांे को नशे का आदि बनाने के खेल में कई कर्मियों पर सख्त कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं डीएम के जांच बैठाने के बाद जिला अस्पताल में खलबली मची हुई है।

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