Chandrayaan 3 Landing: Chandrayaan-3 की सॉफ्ट लैंडिंग पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। इस मिशन को सफल बनाने के लिए इसरो के साथ अब अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) काम कर रही है। मिशन पर सिर्फ भारत ही नहीं कई देशों की नजरें हैं। इस मिशन के कामयाब होने के बाद कई देशों को इसका लाभ मिलने वाला है। आज Chandrayaan-3 मिशन के लिए NASA और ESA ने इसरो का हाथ मदद के लिए थाम लिया है। दोनों 23 अगस्त को Chandrayaan-3 की सॉफ्ट लैंडिंग कराने में इसरो की करेंगे मदद। Chandrayaan-3 अपनी मंजिल से चंद घंटों की दूरी पर है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का मिशन चंद्रयान-3 के इतिहास रचने में अब कुछ घंटों का समय बचा है। चंद्रयान-3, 23 अगस्त को चांद की सतह पर उतरने के लिए तैयार है।
मिशन के कामयाब होने के बाद कई देशों को लाभ
Chandrayaan-3 मिशन पर पूरे विश्व की नजर है। इस मिशन के कामयाब होने के बाद विश्व के कई देशों को इसका लाभ मिलेगा।
इसरो की तरफ से जानकारी दी गई है कि अब अमेरिका स्पेस एजेंसी नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) ने Chandrayaan-3 मिशन को सफल बनाने के लिए भारत का हाथ पकड़ लिया है। विश्व की तीन बड़ी स्पेस एजेंसियां एक साथ मिलाकर Chandrayaan-3 मिशन को सफल बनाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, यान के लॉन्च के दौरान से दोनों एजेंसियों ने चंद्रयान-3 (Chandrayaan 3) को मॉनिटर करना शुरू किया था।
NASA से मिल रही बड़ी मदद
इसरो को नासा से मिशन में काफी मदद मिल रही है। जानकारी के अनुसार, मिशन के लिए बड़ी मदद नासा के कैलिफोर्निया में डीएसएन कॉम्प्लेक्स से लगातार मिल रही है। क्योंकि यह पृथ्वी पर भारत के दूसरे छोर पर मौजूद है। ऐसे में जब भारत में स्पेस स्टेशन से चांद नहीं दिखेगा। तो यहां से जानकारी एकत्र कर इसरो को उपलब्ध कराई जाएगी। नासा डॉपलर इफेक्ट के लिए यान के रेडियो सिग्नल को मॉनिटर कर रहे हैं। जो स्पेसक्राफ्ट को नेविगेट करने में सहायता करता है। चांद की सतह पर उतरने के दौरान जानकारी काफी अहम होगी। इससे पता चलता है कि रियल टाइम में स्पेसक्राफ्ट कैसे काम कर रहा है।
ESA मैसेंजर बना
नासा के साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) भारत की मदद कर रही है। स्पेस एजेंसी ESA का कौरौ, फ्रेंच गुयाना स्थित 15 मीटर लंबा एंटिना और यूके के गोनहिली अर्थ स्टेशन में स्थापित 32 मीटर लंबे एंटिना को तकनीकी क्षमताओं के समर्थन के लिए चुना था।
ईएसए, एस्ट्रैक नेटवर्क में दो ग्राउंड स्टेशनों के माध्यम से उपग्रह को कक्षा में ट्रैक करता है। ये दोनों स्पेस स्टेशन Chandrayaan-3 मिशन को लेकर बेंगलुरु में मिशन संचालन टीम और Chandrayaan-3 उपग्रह के बीच संपूर्ण संचार चैनल उपलब्ध करा रहा है।
