चंबल नदी मध्यप्रदेश और राजस्थान से होकर उत्तर प्रदेश में यमुना नदी में जाकर मिलती है, पहले इस नदी को “चरमवाती “कहा जाता था। इतिहासकारों के मुताबिक, चरमवाती नदी के किनारे कौरवों और पांडवों ने जुआ खेला था और कौरवों ने चरमवाती नदी के पास द्रौपदी का चीरहरण करने की कोशिश की थी और भगवान श्रीकृष्ण ने मदद कर द्रौपदी का मान रखा था |
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क्योकि द्रौपदी का चीरहरण चरमवाती नदी के पास हुआ था तभी द्रौपदी ने शाप दिया कि जो कोई चरमवाती नदी का पानी पिएगा, वे नष्ट हो जाएगा। इसी कारण लोग यहां का पानी नहीं पीते थे और काफी लंबे समय तक लोग ने बसेरा नहीं बनाया।
इसके अलावा ये भी कहा जाता है की रंतिदेव चंबल नदी के किनारे यज्ञ करते थे और यज्ञ के दौरान जानवरों की बलि दी जाती थी। इसी वजह से चंबल नदी के पानी का रंग हमेशा लाल रहता था। हालांकि, आज चंबल नदी का पानी स्वच्छ है और चंबल नदी के किनारे लोग रह रहे है | आपको ये भी बता दे की चंबल नदी के किनारे दो राष्ट्रीय अभयारण्य हैं, जहां आप जलीय जीवों का दीदार कर सकते है |
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राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहते है, यहां घड़ियाल, लालमुकुट कछुआ समेत कई जलीय जीव हैं। ये 2,100 वर्ग मील में फैला है। नवंबर से लेकर मार्च महीने के दौरान चंबल की यात्रा का खूब मजा आता है |

