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Muslim Personal Law Board Says: आरोपियों के साथ दोषियों जैसा सलूक अराजकता और आतंकवाद है

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह ने आज अपने बयान में कहा कि इस समय सरकार जिस अराजकता का प्रदर्शन कर रही है और जुर्म साबित होने से पहले ही मुल्ज़िमों के साथ मुजरिमों जैसा सलूक कर रही है बेहद अफसोसनाक और आतंकवाद की स्थिति है। पैगम्बर इस्लाम को मुसलमान अपनी जान और औलाद  से भी ज़्यादा मोहब्बत रखते हैं, मगर एक तो सत्ताधारी पार्टी के प्रवक्ताओं ने गुस्ताखी करके मुसलमानों का दिल घायल किया है और फिर बजाय इसके कि उस बदज़ुबान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में आती, उलटे मुसलमानों के ज़ख्मों पर नमक छिड़का जा रहा है। जो लोग इस बेहूदा हरकत के खिलाफ शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं उनके खिलाफ केस दर्ज किया जा रहा है, उनपर लाठीचार्ज हो रहा है और उनके घरों को ढहाया जा रहा है। जब तक एक व्यक्ति पर कोर्ट के जरिया जुर्म साबित न हो जाय उस वक्त तक ओह सिर्फ मुल्ज़िम है, उसके साथ मुजरिमों जैला सलूक गैर कानूनी है और जिस गुस्ताख़ का जुर्म सबके सामने सबूत के साथ मौजूद है और उस जुर्म को स्वीकार भी किया गया है। उसके खिलाफ सरकार का कोई कार्रवाई न करना निश्चित ही न्याय की हत्या है।

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कानून का विरोध करने और पत्थर फेंकने के कारण किसी का घर गिरा देने और इस्लाम ज़िंदाबाद का नारा लगाने के कारण गोली मरकर हत्या कर देने की इजाज़त कौन सा कानून देता है।   पर्सनल लॉ बोर्ड केंद्र और राज्य सरकारों से मांग करता है वह ऐसी अन्यायपूर्ण हरकत से बाज़ आये, पत्थर फेंकने वाले जो भी हों, जांच के बाद उनको गिरफ्तार किया जाय और अदालत में पेश किया जाय, फिर अदालत जो फैसला करे उसे लागू किया जाय। बोर्ड ने कहा कि राज्य सरकारों का मौजूदा रवैया उन्माद को बढ़ावा देने वाला है, ऐसी सरकारों से अम्न के माहौल की जगह नफरत और दंगा फसाद का माहौल पैदा हो होगा, बोर्ड ने मांग की कि इस मामले में गिरफ्तार लोगों को फौरी तौर रिहा किया जाय। उनके खिलाफ अदालत में मामला पेश किया जाय, जिन लोगों की जाने गयी हैं और जो लोग घायल हुए हैं उनके परिवारों भरपूर मुआवज़ा दिया जाय।

बोर्ड ने मुसलमानों से भी अपील की है कि  धैर्य से काम लें, गुस्ताखी  खिलाफ नाराज़गी ज़ाहिर करने के लिए लोकल सरकारी अधिकारीयों को ज्ञापन पेश करें, पुलिस अत्याचार के सबूत जमा करके सामुदायिक संगठनों के सुपुर्द करें। जिस पर वो पुलिसवालों  के खिलाफ FIR दर्ज करा सकें और इस बात को ध्यान में रखें कि सांप्रदायिक तत्व चाहते हैं आप उत्तेजित हों और पुलिस उसको ज़ुल्म और ज़्यादती का बहाना बनाये, हमें उनको इसका मौका नहीं देना चाहिए।

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