Site icon Buziness Bytes Hindi

Jayant Is Necessary For SP: मुलायम की बेटे अखिलेश को सीख, पश्चिम में सपा के लिए जयंत हैं जरूरी

Jayant Is Necessary For SP: मेरठ। एक दिन पहले तक जहां राज्यसभा भेजे जाने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी पत्नी डिंपल का नाम तय कर रखा था। आखिर ऐसा क्या हुआ कि कुछ क्षणों में ही अखिलेश ने पत्नी डिंपल यादव के स्थान पर रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी के नाम की घोषणा की। इसके पीछे सपा संस्थापक मुलायम सिंह की राजनैतिक सलाह और दूरदर्शिता बताई जा रही है। जिससे एक सोची समझी रणनीति के तहत रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी सपा के सहयोग से राज्यसभा जाएंगे। जयंत चौधरी 30 मई को लखनऊ में नामांकन करेंगे।

Also Read : Jayant Chaudhary In Rajya Sabha: सपा के समर्थन से जयंत चौधरी जाएंगे राज्यसभा, सपा अध्यक्ष अखिलेश ने किया ऐलान

जयंत के नाम की घोषणा गत गुरुवार को सपा मुखिया अखिलेश यादव ने की थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि जयंत चौधरी को राज्यसभा के लिए सपा-रालोद का संयुक्त प्रत्याशी घोषित किया है। जयंत को प्रत्याशी बनाने से पहले चर्चाओं में डिंपल यादव नाम था। दरअसल, दो दिन पहले तक सपा ने राज्यसभा के लिए तीन प्रत्याशियों को उतारने का फैसला किया। जिसमें कपिल सिब्बल, जावेद अंसारी और डिंपल यादव के नाम थे। उसी दिन कपिल सिब्बल और जावेद अंसारी ने नामांकन दाखिल कर दिया।

लेकिन इसी बीच कुछ रालोद नेता सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले और जयंत चौधरी की नाराजगी के बारे में बताया। वहीं जयंत चौधरी की नाराजगी दूसरी ओर सपा संस्थापक मुलायम सिंह भी जयंत को ही राज्यसभा भेजना चाहते थे। सपा संस्थापक मुलायम सिंह ने बेटे अखिलेश को समझाया और 2024 के आम चुनाव को देखते हुए ही जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजने के लिए कहा। जिसके बाद 24 घंटे के भीतर ही जयंत चौधरी के उम्मीदवारी की घोषणा भी कर दी गई। 

Also Read : Nakul Dubey Joins Congress: प्रियंका से मुलाकात कर नकुल दुबे हुए कांग्रेस में शामिल

अखिलेश यादव ने रालोद प्रमुख जयंत चौधरी को राज्यसभा के लिए संयुक्त प्रत्याशी घोषित कर गठबंधन को टूटने से बचा लिया। अगर अखिलेश ने मौका नही दिया होता, तो शायद जयंत दूसरे दल से गठबंधन कर सकते थे। वहीं रालोद विधायकों ने अखिलेश को गठबंधन धर्म याद दिलाया। इस पूरे खेल के पीछे मुलायम सिंह ने अपना सियासी दांव चला। जिसमें मुलायम सिंह ने अखिलेश को सलाह दी कि जयंत को हर हाल में अपने साथ रखना है। पिता की इस सलाह को  अखिलेश ने मान लिया। विधानसभा में भले ही रालोद के आठ विधायक हों। लेकिन 2024 के लिए रालोद जरूरी है। अखिलेश यह बात जानते हैं कि अगर रालोद की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे तो 2024 के आम चुनाव के पहले गठबंधन खतरे में पड़ जाएगा। सपा-रालोद साथ रहे तो लोकसभा चुनाव में लाभ हो सकता है पर अगर नाराजगी हुई और जयंत चले गए तो निश्चित रूप से पश्चिमी उप्र में सपा की राह मुश्किल हो जाएगी।

Exit mobile version