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Monkeypox Virus Alert In India: कोरोना के बीच तेजी से फैल रहा मंकीपॉक्स,15 देश चपेट में भारत में अलर्ट

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण से जूझ रहे भारत सहित पूरी दुनिया में अब मंकीपॉक्स ने दस्तक की है। मंकीपॉक्स की चपेट में पिछले 15 दिन में 15 देश आ चुके हैं। मंकीपॉक्स तेजी से दूसरे अन्य देशों में फैल रहा है। इसको लेकर भारत में भी अलर्ट जारी किया गया है। गत सोमवार को बेल्जियम के बाद ब्रिटेन में मंकीपॉक्स के मरीज मिलने से हड़कंप मच गया। ब्रिटेन में दूसरे देशों से आने वालों के लिए अब 21 दिन का क्वारैंटाइन होना जरूरी कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि किसी देश में इस बीमारी का एक मामला आउटब्रेक माना जाएगा।

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वहीं तेजी से फैल रहे मंकीपॉक्स के बीच भारत में अलर्ट जारी किया गया है। मुंबई के अलावा अन्य मेट्रो महानगरों में मंकीपाक्स को लेकर अलर्ट घोषित किया गया है। मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल में मंकीपॉक्स के संदिग्ध मरीजों के लिए आइसोलेशन वॉर्ड तैयार किया गया है। हालांकि, अभी देश में इस बीमारी का कोई मामला सामने नहीं आया है। लेकिन इसको लेकर अभी से एहतियात बरता जा रहा है। विश्व में केवल दो सप्ताह में ही मंकीपॉक्स के मामलों की संख्या 100 के पार पहुंच चुकी है। इस समय दुनिया के 15 देशों में मंकीपाक्स फैल चुका है। इन 15 देशों में अमेरिका,ब्रिटेन, स्वीडन, इटली, स्पेन, फ्रांस, जर्मनी,  पुर्तगाल, कनाडा,ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, ऑस्ट्रिया, इजराइल और स्विट्जरलैंड हैं। जहां पर मंकीपॉक्स के मामले सामने आए हैं। बीमारी से राहत की बात ये है कि इससे अभी तक किसी की मौत नहीं हुई है। 

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मंकीपॉक्स को लेकर केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया है। इसी के साथ जरूरी दिशा-निर्देश सभी राज्यों को जारी किए गए हैं। तेजी से फैलते मंकीपॉक्स के संक्रमण को देखते हुए नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को अलर्ट जारी किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एयरपोर्ट और बंदरगाहों अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मंकीपॉक्स प्रभावित देशों की यात्रा करके लौटे यात्री को तुरंत आइसोलेट करें और सैंपल जांच के लिए पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजें।

बता दें कि मंकीपॉक्स छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। मंकी पाक्स का खतरा गर्भवतियों और बच्चों को अधिक है। मंकीपॉक्स जैसा दुर्लभ संक्रमण वैसे तो खुद ठीक हो जाता है। लेकिन यह कुछ लोगों में गंभीर भी साबित जाता है। पांच साल से छोटे बच्चे इसकी चपेट में जल्दी आते हैं। जिन लोगों में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई है। उनमें से अधिकांश का अफ्रीकी देशों से कोई कनेक्शन नहीं है। बताया जा रहा है कि मंकी पाक्स वायरस मध्य और पश्चिम अफ्रीकी देशों में अधिक पाया जाता है।

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