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Swine Flu Cases: मंकीपाक्स और टोमैटो फ्लू के बीच अब स्वाइन फ्लू के बढे़ मामले, त्योहारी सीजन में संक्रमण बढ़ने के संकेत

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के दो साल से अधिक का समय बीत गया है। कोरोना के नए वैरिएंट्स के साथ अब कई अन्य प्रकार के संक्रमण का दौर जारी है। इनमें मंकीपॉक्स और टोमैटो फ्लू के साथ अब कई हिस्सों में स्वाइन फ्लू के मामले भी बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार झारखंड की राजधानी रांची में तीन लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि की गई है। झारखंड के अलावा दिल्ली, केरल और महाराष्ट्र में भी स्वाइन फ्लू के मामले आ चुके हैं। मिजोरम में पिछले महीनों में स्वाइन फ्लू के मामले की रिपोर्ट किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार देश में इस साल की शुरुआत से स्वाइन फ्लू  के मामले मिल रहे हैं। कोरोना संक्रमण के बीच जारी इन खतरों को लेकर लोगों को सावधानी बरतते रहने की जरूरत है।

रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली में अगस्त महीने में स्वाइन फ्लू के करीब 15 मामले दर्ज किए थे। वहीं महाराष्ट्र में इस साल एक  जनवरी से 28 अगस्त के बीच स्वाइन फ्लू के 2337 मामले और 98 मौतें अब तक हो चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार संक्रमण के इस दौर में कई तरह की चुनौतियां अब बढ़ती जा रही हैं। इन सभी खतरों से बचने के लिए लोगों को लगातार बचाव के उपाय करते रहने की जरूरत है। चूंकि अब त्योहारों का सीजन शुरू हो रहा है। ऐसे में सावधानियों को लेकर और अलर्ट हो जाने की जरूरत है। एच1एन1 फ्लू को स्वाइन फ्लू के रूप में जाना जाता है। यह मुख्य रूप से फ्लू ‘इन्फ्लूएंजा’ वायरस के एच1 एन 1स्ट्रेन के कारण होता है। इसके लक्षण मौसमी फ्लू के जैसे होते हैं। इसमें बुखार, खांसी, खराश, बहती नाक, शरीर दर्द, सिरदर्द के साथ ठंड लगना और थकान होती हैं। संक्रमितों में दस्त और उल्टी की परेशानी हो सकती है। संक्रमण के कारण मृत्युदर 1.4 प्रतिशत के करीब हो सकता है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं इस समय देश में संक्रमण का दौर चल रहा है। मच्छर जनित कई बीमारियां बढ़ रही हैं। ऐसे में सभी लोगों को स्वाइन फ्लू संक्रमण और अन्य में समय रहते अंतर करना बहुत जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि देश में इन दिनों कोविड-19 और स्वाइन फ्लू दोनों का संक्रमण फैल रहा हैं। इनके अधिकतर लक्षण एक जैसे हो सकते हैं। जिनको लेकर लोगों को विशेष ध्यान देते रहने की जरूरत है। दोनों बीमारियों के कई लक्षण एक समान हैं। पर दोनों की गंभीरता का स्तर भी अलग है। ऐसी स्थिति में सही निदान होना भी बहुत आवश्यक है।

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