नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की द्विमासिक बैठक में रेपो रेट 4 फीसदी पर बरकरार रखा है. एमपीसी के सभी सदस्यों ने एकमत से ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने का फैसला किया. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने पाॅलिसी का एलान करते हुए कहा कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को यथावत रखने का फैसला किया है. आरबीआई गवर्नर ने वित्त वर्ष 2021-22 में जीडीपी ग्रोथ रेट 10.5 फीसदी रखने का अनुमान जताया है. साथ ही चालू वित्त वर्ष की चैथी तिमाही में खुदरा महंगाई दर का लक्ष्य संसोधित कर 5.2 फीसदी कर दिया है.
क्या है रेपो रेट
रेपो रेट वह दर है, जिस पर आरबीआई बैंकों को लोन देता है. बता दें कि वित्त वर्ष 2021-22 का बजट पेश होने के बाद यह आरबीआई की पहली पॉलिसी है. छह सदस्यों वाली एमपीसी की बैठक बुधवार 3 फरवरी से शुरू हुई थी. सेंट्रल बैंक ने पिछले साल फरवरी से अब तक रेपो रेट में 1.15 फीसदी की कटौती की है.
रिवर्स रेपो रेट भी यथावत
रिवर्स रेपो रेट को भी 3.35 फीसदी पर ही रखा गया है. साथ ही MSF और बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पहले की तरह ही 4.25 फीसदी है. RBI ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए GDP ग्रोथ रेट 10.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जबकि, आर्थिक सर्वे में इसे 11 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था. वहीं इस वित्त वर्ष GDP में 7.7 फीसदी गिरावट का अनुमान जताया गया है.
क्या बोले शक्तिकांत दास
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि महंगाई में कमी आई है और यह अब 6 फीसदी के टॉलरेंस लेवल से नीचे आई है. उन्होंने कहा कि समय की मांग अभी ग्रोथ को सपोर्ट करने की है. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कैपिसिटी यूटिलाइजेशन सुधरा है. यह इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 63.3 फीसदी रहा जो पहली तिमाही में 47.3 फीसदी था. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी और तेज हुई है.

