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मोबाइल उपभोक्ता बढ़ाए, मगर सुविद्याओं पर ध्यान नहीं

जियो के ग्राहक सबसे अधिक परेशान, वोडाफोन-आईडिया, एयरटेल के भी हाल खराब

न्यूज डेस्क।

कैसे कह दें कि काॅल नहीं मिलती
रोज लगती है मगर बात नहीं होती

यह समस्या आज हर मोबाइल उपभोक्ता को उठानी पड़ रही है। हेलो-हेलो, आवाज आ रही है न, मोबाइल काॅल करने के बाद यही बात कहते-कहते कई बार में जाकर दूसरे से बात हो पाती है। कई बार काॅल मिलाते किसी को हैं और वह किसी और के मोबाइल पर लग जाती है। अब फोन सही जगह पर लग भी गया तो कितनी देर बात हो पायेंगी यह मोबाइल कंपनी की मेहरबानी पर निर्भर है।

पैसे भले ही आप दे रहे हों लेकिन चलेगी मोबाइल कपंनियों की ही। कस्टमर केयर पर पहले तो बात होनी मुश्किल है। कई नंबर दबाने और लंबे इंतजार के बाद भी मिलता है तो सिर्फ आश्वासन। जियो के उपभोक्ता सबसे अधिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

वहीं आईडिया-वोडाफोन के विलय के बाद भी नेटवर्क के हालात खराब ही हैं। एयरटेल के उपभोक्ताओं की समस्याएं भी कम नहीं हैं। हालांकि बीएसएनएल की कनेक्टिविटी अपने ही नेटवर्क पर अच्छी है मगर दूसरे नेटवर्क से बीएसएनएल पर या बीएसएनएल द्वारा काॅल किये जाने पर यही समस्याएं आ रही है।

कभी शान दिखाने का प्रतीक माना जाता मोबाइल आज हर आदमी की जरूरत बन गया है। मोबाइल की काॅल और इंटरनेट की दरें कम होने के बाद मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। वहीं जियो के सस्ते प्लानों ने मोबाइल सेवा क्षेत्र मे क्रांति ला दी। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा मार्च 2020 में जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 115.14 करोड़ थी।

उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 16.85 करोड़ से ज्यादा मोबाइल उपभोक्ता थे। इसके बाद भारत में लगाये गये लाॅकडाउन, ऑनलाइन क्लासेज आदि के चलते मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या में और अधिक इजाफा हुआ है। मोबाइल नेटवर्क कंपनियों ने भी लुभावने आॅफर दिये और उपभोक्ताओं की संख्या में इजाफा कर लिया। मगर बढ़ी उपभोक्ताओं की संख्या के मुताबिक मोबाइल नेटवर्क कंपनियों ने खुद को अपडेट नहीं किया जिसका खामियाजा इन कंपनियों के उपभोक्ताओं को चुकाना पड़ रहा है।

नेटवर्क व काॅल ड्राॅप की समस्या से परेशान उपभोक्ता आज नेटवर्क कंपनियों को कोसते नजर आ रहे हैं। इन मोबाइल कंपनियों की इंटरनेट सेवा भी अपेक्षानुसार कार्य नहीं कर रही है। 4जी के जमाने में भी इंटरनेट की स्पीड 2जी जैसी मिल रही है। जिसके कारण ऑनलाइन कार्य करने में परेशानी हो रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बात करते-करते काॅल कट जाती है। कई बार तो काॅल करने पर अपनी ही आवाज पलट कर सुनाई देती है। तो कई बार काॅल उठ जाती है लेकिन दूसरी ओर से आवाज ही नहीं आती।

जियो का नेटवर्क कर रहा अधिक परेशान
मोबाइल सेवा क्षेत्र में नयी क्रांति लाने वाले जियो ने अपने ग्राहको को हमेशा लुभावने ऑफर दिये हैं। यही कारण है कि जियो ने बेहद कम समय मेें रिकार्ड मोबाइल उपभोक्ताओं को अपना बना लिया है। मगर आज जियो के ग्राहक ही सबसे अधिक परेशान हैं। क्योंकि उपभोक्ताओं की संख्या के अनुसार जियो ने अपने संसाधन नहीं बढाये। जिसके कारण ग्राहको को समस्याएं उठानी पड़ रही हैं। मेरठ के गंगानगर क्षेत्र में रहने वाली छात्रा सुनिधि शर्मा ने बताया कि वह काफी समय से जियो का सिम उपयोग कर रही थीं। मगर काॅल ड्राप और धीमी इंटरनेट स्पीड की समस्याओं ने उन्हें परेशान कर दिया। इस संबंध में कई बार कस्टमर केयर को भी बताया गया लेकिन वहां से आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। ऐसे में उन्हें अपना मोबाइल नंबर पोर्ट कराने को मजबूर होना पड़ा। वहीं इंद्रप्रस्थ काॅलोनी निवासी धीरज दीक्षित जियो के खराब नेटवर्क और स्लो इंटरनेट स्पीड के चलते ऑफिस के कार्य भी नहीं कर पा रहे हैं।

वोडाफोन-आईडिया, एयरटेल का नेटवर्क भी संतोषजनक नहीं
वोडाफोन-आईडिया के मिल जाने से उपभोक्ताओं को बेहतर सर्विस मिलने की उम्मीद बंधी थी मगर हालिया दिनों में उन्हें भी निराशा ही मिली है। चौबे कंपाउंड में रहने वाले राहुल चतुर्वेदी हों या गंगानगर में रहने वाले सुनील शर्मा, वोडाफोन-आईडिया के अनेक ग्राहक अब खराब नेटवर्क से तंग आ चुके हैं। वहीं एयरटेल की स्थिति अंधों में काणा राजा वाली है। यानी नेटवर्क तो उसका भी अच्छा नहीं है मगर प्रतिस्पर्धी मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के मुकाबले उसके इंटरनेट की स्पीड संतोषजनक है। मगर इन मोबाइल कंपनियों की उपभोक्ताओं का भी यही कहना है कि कंपनिया नेटवर्क प्राॅब्लम की बात बता उपभोक्ताओं की शिकायत को नजर अंदाज कर देती है। कस्टमर केयर पर संपर्क करने के बाद भी काॅल ड्राॅप की शिकायत जस की तस बनी है।

यह मोबाइल सेवा कंपनियां अपने नेटवर्क को बेहतर बता कर काॅल ड्राॅप, काॅल जंपिंग व काॅल रिजेक्ट जैसी समस्याओं के लिये दूसरी कंपनियों को जिम्मेदार ठहरा देती हैं। मगर इन दावों के बीच उपभोक्ताओं की परेशानियां बरकरार है। जायें लेकिन तो जायें कहां वाली स्थिति में आ चुके उपभोक्ता को राह भी नहीं दिख रही।

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