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Vivo India: बुरे वक्त से गुजर रही मोबाइल कंपनी वीवो, जांच एजेंसी कस रही शिकंजा

Vivo India

नई दिल्ली। देश में जोरशोर से अपना काम शुरू करने वाली मोबाइल कंपनी वीवो इस समय बुरे दौर से गुजर रही है। केंद्र की मोदी सरकार ने जून 2020 में चीन के करीब 200 से अधिक ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसी के साथ ही चीनी मोबाइल कंपनी वीवो पर भी शिकंजा कसा था। जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई),आयकर विभाग सहित विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी थी। इसके अलावा विभिन्न राज्यों की स्थानीय पुलिस ने भी वीवो के खिलाफ आयकर चोरी और सीमा शुल्क से लेकर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग तक आरोपों की जांच अपने स्तर से शुरू की थी।

सूत्रों का दावा है कि यद्यपि ये कंपनी देश में अपनी मूल फर्मों से अलग कंपनी के तौर पर पंजीकृत थीं। लेकिन वीवो चीन से सीधे निर्देश ले रही थीं और पर्याप्त मात्रा में धन वापस चीन भेज रही थीं। आरोप हैं कि रॉयल्टी या लाइसेंस शुल्क के तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग भी वीवो द्वारा की जा रही थी। वीवो ने आयकर बचाने के लिए घाटा दिखाकर सेल्स बुक में हेरफेर भी की थी। जबकि इसका मुनाफा दूसरी अन्य कंपनियों को दिया था।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूर्व निदेशक करनाल सिंह की माने तो वीवो के इस तरह के कृत्यों से उसके टैक्स बेस में कमी आती गई। जांच के बाद वीवो के अपराध सामने आए और फिर सख्त कार्रवाई की जरूरत पड़ी।

इतना ही नहीं वीवो मोबाइल कंपनी ने उच्च ब्याज दरों पर अल्पकालिक कर्ज देकर कई फार्मों को भी धोखा दिया। वीवो ने मोबाइल फोन ऐप के माध्यम से निजी डेटा का इस्तेमाल किया। इस साल की शुरूआत में ही कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने कथित मोबाइल कंपनी वीवो के खिलाफ एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज किए। यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के अलर्ट के बाद उठाया गया। गृह मंत्रालय ने दावा किया था कि कुछ भारतीय कंपनियों के बोर्ड में चीनी नागरिक हैं और वे मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध गतिविधियों में भाग ले रहे हैंं।

निजी चीनी कंपनी वीवो के खिलाफ कार्रवाई में गति उस समय सामने आई जब लद्दाख में सीमा पर गतिरोध के अलावा कोविड पाबंदियों को लेकर भारतीय छात्रों को चीनी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए वापस लौटने की अनुमति नहीं दिए जाने से दोनों देशों के बीच परस्पर संबंधों में खटास आ गई थी। लेकिन उसके बाद भी वीवो कंपनी देश में गुपचुप तरीके से अपनी जड़े जमा रही थी। रही सही कही मेरठ में वीवो कंपनी के खुले एक कारनामे से पूरी हो गई। उसके बाद तो कंपनी के अधिकारी भी देश छोड़कर भाग गए।

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