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योगी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी मिल्कीपुर सीट

prathishtha

अमित बिश्नोई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी विधानसभा उपचुनावों के लिए अयोध्या की मिल्कीपुर सीट की जिम्मेदारी संभाली है। हालांकि उपचुनाव 10 सीटों पर होने वाले हैं और योगी जी के राजनीतिक भविष्य के लिए ये सभी सीटें महत्वपूर्ण हैं क्योंकि कहा जा रहा है कि इन उपचुनावों में मिलने वाली कामयाबी और नाकामी ये निर्णय कर सकती है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वही बने रहेंगे या फिर 2027 के लिए कोई नया चेहरा बिठाया जा सकता। दरअसल 10 में से सिर्फ मिल्कीपुर सीट अपने ज़िम्मे लेने के पीछे योगी आदित्यनाथ के फैसले को राजनीतिक पैंतरेबाजी बताया जा रहा है, लेकिन देखा जाय तो इस फैसले के पीछे योगी आदित्यनाथ की भविष्य की रणनीति छुपी है.

लोकसभा चुनाव में अयोध्या की सीट हारना भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के लिए तो बड़ा झटका बताई ही जा रही है लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की साख पर भी ये हार बहुत बड़ा बट्टा है. भाजपा की पूरी राजनीती ही अयोध्या और राममंदिर के इर्द गिर्द ही घूमती है. ऐसे में अयोध्या की मिल्कीपुर सीट की ज़िम्मेदारी खुद पर लेना उनके लिए बनता है क्योंकि लोकसभा के बाद अगर या सीटें भाजपा फिर हार गयी तो पूरे देश में उसके लिए एक और बहुत बुरा सन्देश जायेगा। उसकी साख बुरी तरह प्रभावित होगी, निश्चित ही प्रदेश का मुखिया होने के नाते योगी आदित्यनाथ के लिए इस सीट का जीतना बहुत ज़रूरी है. यही वजह है कि इस समय वो लगातार ऐसे फैसले कर रहे हैं जो समाज को जातियों में बाँट रहे हैं, उनके बयान लगातार सांप्रदायिक ध्रूवीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं. वो इन दिनों बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार की ख़बरों को दलित हिन्दुओं से जोड़ रहे हैं और अखिलेश यादव पर हमला कर रहे हैं कि वो इस मामले पर चुप्पी साधे हैं. आज ही उन्होंने एक कार्यक्रम में पाकिस्तान को भी घसीटा है और कहा है कि आने वाले समय में पाकिस्तान का वजूद समाप्त हो जायेगा या फिर वो भारत में शामिल हो जायेगा, ज़ाहिर सी बात है कि वो ऐसा सिर्फ उपचुनावों के मद्देनज़र कह रहे हैं.

वो लगातार अपनी हिन्दू ह्रदय सम्राट की छवि को चमकाने का प्रयास कर रहे हैं, बांग्लादेश पर उनका बयान हिंदुओं के बीच जाति विभाजन को पार करने के प्रयास का संकेत देता है फिर वो चाहे वे अगड़े हों, पिछड़े या फिर दलित। वो एक व्यापक हिंदू पहचान को मजबूत करने कोशिश कर रहे हैं. कट्टर हिंदुत्व के एजेंडे पर मुख्यमंत्री का जोर न केवल इन उपचुनावों में बल्कि व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में भी गूंजने की उम्मीद है क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनावों की गूँज अभी से सुनाई देने लगी. अखिलेश यादव ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इन उपचुनावों में सफाया करेंगे और 2027 के चुनावों में भी हराएंगे. बाबा जी जो हथकंडे अपना रहे हैं वो अब चलने वाले नहीं, ये लोकसभा चुनावों में जनता उन्हें बता चुकी है.

अयोध्या, भाजपा की वैचारिक और चुनावी आकांक्षाओं से गहराई से जुड़ा शहर है, जो पार्टी की हिंदू एकता की कहानी का केंद्र भी है लेकिन परिणाम उम्मीदों के उलट आये। संवैधानिक परिवर्तनों और आरक्षण के उन्मूलन पर विपक्ष की आवाज़ ने हिंदू मतदाताओं को जाति के आधार पर सफलतापूर्वक विभाजित कर दिया। ये योगी के लिए बहुत बड़ा झटका था. इस झटके से उबरने के लिए योगी आदित्यनाथ ने कई ऐसे फैसले लिए हैं जो उनके हिंदुत्व एजेंडे को मजबूत करते हैं, इन्हीं में एक फैसले में कांवड़ यात्रा मार्ग में आने वाले दुकानदारों और भोजनालयों को नेम प्लेट लगाने का निर्देश देना शामिल था। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को भले ही रोक दिया लेकिन योगी जी ने हिंदू समुदाय के बीच अपना सन्देश तो पहुंचा ही दिया। कुछ दिनों पहले योगी सरकार ने धर्मांतरण कानून को और भी सख्त बना दिया। कानून में इस संशोधन के सहारे दक्षिणपंथी हिंदू समूहों द्वारा “लव जिहाद” के रूप में संदर्भित किए जाने वाले मुद्दे से निपटने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि कर दी गयी- एक सन्देश दिया गया कि मुस्लिम पुरुष हिंदू महिलाओं को शादी का लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन करने का प्रयास कर रहे हैं। मुस्लिम बहुल अकबरनगर को बुलडोज़रों से ध्वस्त करने वाले मुख्यमंत्री योगी ने लखनऊ में दो हिंदू-बहुल कॉलोनियों- पंत नगर और इंद्रप्रस्थ नगर को ध्वस्त होने से रोक दिया जबकि मकानों पर निशान लग चुके थे.

मिल्कीपुर सीट को जिताने की ज़िम्मेदारी योगी आदित्यनाथ द्वारा अपने ऊपर लेने के फैसले को भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को विपक्ष की चुनौती के लिए एक सुनियोजित प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाता है, प्रतिष्ठा का सवाल बनी इस महत्वपूर्ण सीट पर अभियान की अगुआई करके योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता को फिर से स्थापित करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री योगी ने इस बात पर लगातार जोर दे रहे हैं कि चुनावी नतीजों के बावजूद, भाजपा की हिंदुत्व के प्रति प्रतिबद्धता अटल है। बांग्लादेश के हिन्दुओं की बात करके योगी आदित्यनाथ स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि जातिगत विभाजन हिंदू समुदाय की सुरक्षा और एकता को खतरे में डाल सकता है। योगी के अनुसार, जाति-आधारित विभाजन पर ध्यान केंद्रित करके, सपा और कांग्रेस जैसी पार्टियाँ हिंदू समुदाय के व्यापक हितों की वकालत करने के बजाय अपने फायदे के लिए इन विभाजनों का फायदा उठा रही हैं। इसलिए आने वाले दिनों में होने वाले उपचुनाव केवल मिलकपुर सीट के लिए लड़ाई नहीं है बल्कि सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा भविष्य की चुनावी चुनौतियों से पहले हिंदू वोट बैंक को मजबूत करने की एक मज़बूत कोशिश है। मिल्कीपुर योगी आदित्यनाथ के लिए सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं बल्कि उनका राजनीतिक भविष्य है. हालाँकि इस सीट पर समाजवादी पार्टी का ही दबदबा रहा है लेकिन अयोध्या में हार ने इस सीट के महत्त्व को बिलकुल बदल दिया है. सिर्फ योगी आदित्यनाथ के लिए ही नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी और यहाँ के पूर्व विधायक और अयोध्या लोकसभा सीट जीतने के बाद विपक्ष के आइकॉन बने अवधेश प्रसाद के लिए भी इस सीट का महत्त्व और भी बढ़ गया है, मिल्कीपुर इन उपचुनावों में VVIP सीट बन चुकी है और यकीन कीजिये कि इस सीट के लिए भाजपा और विपक्ष का हर छोटा बड़ा नेता वहां पहुंचेगा।

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