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Military Satellites of India: सैटेलाइट के जरिए अब देश भर में सैन्य भूमि पर रखी जाएगी नजर

नई दिल्ली। देशभर में 17.78 लाख एकड़ सैन्य भूमि का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। अब रक्षा मंत्रालय रक्षा भूमि पर अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण का पता लगाने के काम करेगा। इसके लिए एआई-आधारित सॉफ्टवेयर विकसित किया है। इस ऐप के माध्यम से सैटेलाइट तस्वीरों से अवैध निर्माण और सैन्य भूमि में किए बदलावों का पता लगाया जा सकेगा। ड्रोन इमेजरी,जीपीएस और सैटेलाइट इमेजरी जैसी आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से रक्षा मंत्रालय ने सैन्य भूमि का सर्वेक्षण अब शुरू किया है।

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 महानिदेशालय रक्षा संपदा (डीजीडीई) ने इसके बादे में बताया कि सैटेलाइट और मानव रहित रिमोट व्हीकल इनिशिएटिव यानी सीओई-सर्वे पर एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर विकसित किया है। यह सॉफ्टवेयर सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करके सैन्य भूमि पर अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण का पता लगाएगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इमेजरी, ड्रोन इमेजरी और भू-स्थानिक उपकरण का उद्घाटन गत 16 दिसंबर 2021 को किया। इस चेंज डिटेक्शन सॉफ्टवेयर को भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर यानी बार्क विशाखापत्तनम के सहयोग से बनाया गया है।

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देश की आजादी के बाद पहली बार रक्षा मंत्रालय ने सैन्य भूमि का सर्वेक्षण तीन साल के अंदर कर लिया। देश में सेना की 62 सैन्य छावनियों है। जिसके अंडर में लगभग 1.61 लाख एकड़ और छावनियों के बाहर की 16.17 लाख एकड़ जमीन के सर्वे में तीन साल लग गए। 16.17 लाख एकड़ भूमि में 18 हजार एकड़ जमीन या राज्य सरकारों ने किराए पर ली है या फिर अन्य सरकारी विभागों को हस्तांतरण किये जाने के प्रस्ताव है। अलग समय पर ली गई उपग्रह इमेजरी का विश्लेषण करके अनधिकृत निर्माण के अलावा अतिक्रमण की गई जमीन का भी पता लगाया जाएगा। सॉफ्टवेयर से छावनी बोर्डों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को सैन्य भूमि में किये बदलावों को पहचानने में मदद मिलेगी।

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