संकट हरने वाला मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत 18 जून को
आदिशक्ति मां जगदंबे दूर करती हैं भक्तों के सारे कष्ट
न्यूज़ डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस बार मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत 18 जून, शुक्रवार के दिन रहेगा। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार मासिक दुर्गाष्टमी पर व्रत और पूजन करने वाले भक्त को मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। प्रत्येक मासिक दुर्गाअष्टमी पर भक्तिभाव से व्रत रखने वाले भक्तों के सारे कष्टों को आदिशक्ति मां जगदंबे दूर करती हैं। मां दुर्गा अपने प्रिय भक्तों की समस्त प्रकार के संकटों से रक्षा करती हैं और उनके जीवन में धन, समृद्धि और खुशहाली प्रदान करती हैं। माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करने वाले भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती है व धन-वैभव की प्राप्ति होती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सदियों पहले पृथ्वी पर रहने वाले असुरों ने बहुत शक्तिशाली होेने के बाद स्वर्ग पर विजय प्राप्त करने की ठानी। महिषासुर के नेतृत्व में असुरों और देवताओं में भीषण युद्ध हुआ जिसमें अनेक देवताओं की मृत्यु हो गयी। स्वर्ग में रहने वाले देवताओं में खलबली मच गयी। महिषासुर का अंत करने के लिये भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा ने शक्ति स्वरूप देवी दुर्गा को बनाया। आदिशक्ति मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया। उस दिन से दुर्गा अष्टमी का पर्व प्रारम्भ हुआ।
मासिक दुर्गाष्टमी को मास दुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। मुख्य दुर्गाष्टमी जिसे महाष्टमी कहते हैं, अश्विन माह में नौ दिन के शारदीय नवरात्रि उत्सव के दौरान पड़ती है। धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त दुर्गाष्टमी तिथि पर मां दुर्गा की पूजा सच्चे दिल और पूरे विधि-विधान से करते हैं. उन्हें शुभ फल की प्राप्ति होती है। दुर्गाष्टमी तिथि के दिन भक्त प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद घर में पूजा स्थल की साफ-सफाई कर उसे गंगाजल से शुद्ध करें। पूजा स्थल पर पूजा चैकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। धूप- दीप जलाकर तथा मां दुर्गा को लाल चुनरी चढ़ाएं और अक्षत, लाल पुष्प, फल और मिष्ठान भी अर्पित करें। इसके बाद अमां दुर्गा की चालीसा करें और आरती उतारें। मां दुर्गा की उपासना सच्चे मन से करने वाले भक्त को स्वास्थ्य, धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

