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कोरोना संक्रमण के बाद अब अवसाद से परेशान चीनी नागरिक, शिक्षक और छात्रों की दिमागी सेहत अति गंभीर

बीजिंग। चीन में छात्रों की दिमागी सेहत की समस्या गंभीर होती जा रही है। अब शिक्षक मानसिक समस्याओं से प्रभावित हो रहे हैं।  रिपोर्ट के अनुसार बार-बार लॉकडाउन और उसकी वजह से ऑनलाइन पढ़ाई की मजबूरी का छात्र और शिक्षकों- दोनों की दिमागी हालत पर खराब असर हुआ है।  साल 2020 में चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के अनुसंधानकर्ताओं ने एक अध्ययन में बताया था कि देश के लगभग 25 प्रतिशत किशोर किसी ना किसी प्रकार के डिप्रेशन से बीमार हैं। उसके बाद स्कूलों में मनोचिकित्सा की सुविधा देने की कोशिशें हुईं। लेकिन शिक्षकों की मानसिक हालत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। 

एक रिपोर्ट के अनुसार शिक्षक पहले से अभिभावकों से पड़ने वाले दबावों से परेशान थे। लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी स्थिति और अधिक बिगड़ गई। चीन में लगातार तीसरे साल स्कूल, सरकार की जीरो-कोविड नीति के तहत लागू प्रतिबंधों का पालन करते हुए चल रहे हैं। शिक्षकों के लिए ऐसे प्रतिबंधों के बीच छात्रों को पढ़ाना मुश्किल  है।  पिछले साल आखिर में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया था कि 75 प्रतिशत से अधिक शिक्षक हलकी या गंभीर अवसाद का शिकार हैं। रिपोर्ट में बताया गया था कि प्राइमरी स्कूलों के 34 प्रतिशत और मिडल स्कूलों के 28 प्रतिशत शिक्षकों के डिप्रेशन का शिकार होने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक हालत इतनी गंभीर है कि इस साल संसद और सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की सालाना बैठक में भी इसकी चर्चा हुई है। वहां ये बात स्वीकार की गई है कि शिक्षक पहले के किसी समय की तुलना में आज अधिक थके हुए और ज्यादा परेशान हैं। 

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चीन में हर वर्ष दस सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर प्रकाशित रिपोर्टों में बताया है कि महामारी आने के बाद से शिक्षकों को रोज सामान्य से अधिक समय तक काम करना पड़ रहा है। इस वजह से वो तनाव और चिंता का शिकार हो रहे हैं। कई शिक्षकों ने शिकायत की है कि उनके स्कूल ने कोई मदद नहीं की है। वहां मौजूद मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं का ध्यान छात्रों पर केंद्रित है। जबकि शिक्षकों की अनदेखी की गई।  अधिकारी स्वीकार करते हैं कि कोरोना महामारी का चीन की शिक्षा व्यवस्था पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है। शिक्षक खुद को पहले की तरह पढ़ा पाने में अक्षम पा रहे हैं। जबकि अभिभावक अक्सर दिक्कतों पर ध्यान नहीं देते। अगर उनके बच्चों के नंबर घटते हैं, तो स्कूल में आकर वे शिक्षकों पर बरसते हैं।

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