मेरठ। जिले में पांच कारखाने ऐसे चिह्नित किए हैं। जिनमें कभी भी रसायन दुर्घटना हो सकती है। जिला प्रशासन ने इन पांचों कारखानों को अति खतरनाक श्रेणी में रखा है। इनमें अति ज्वलनशील, विषैले रसायन व गैस का उपयोग होता है। इसी के साथ इनका भंडारण भी किया जाता है। इनमें एथेनाल और क्लोरीन का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।
इन कारखानों को अब दुर्घटना से बचाव के लिए सभी आवश्यक उपायों की व्यवस्था की जाएगी। इसमें काम करने वाले कर्मचारियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने व दुर्घटना होने पर बचाव कार्य में जुटने का प्रशिक्षण मिलेगा। कर्मचारी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद लापरवाह न हो या फिर भूल न जाएं इसलिए समय-समय पर इसकी माक ड्रिल भी होती रहेगी।
साल में एक बार माक ड्रिल जरूरी होगी। जून और दिसंबर में माक ड्रिल करनी होगी। दरअसल, प्रदेश सरकार के पर्यावरण अनुभाग ने किसी तरह की रसायन दुर्घटना से बचने के लिए सतर्कता बरतने और कारखानों को चिह्नित करने का आदेश दिया था। इसी क्रम में ‘जिला संकट स्थिति समूह’ का गठन किया गया है।
मेरठ में इस समय पांच ऐसे कारखाने हैं जहां पर रसायन दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है। इन पांच कारखानों में इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड, परतापुर, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड, पूठा,नंगलामल शुगर कांप्लेक्स, गढ़ रोड, बजाज हिुंदुस्तान लिमिटेड डिस्टलरी यूनिट, किनौनी, कंसल इंडस्ट्रीज गैसेज, ग्राम इकला, सिवाल रोड मेरठ हैं।
इसके अलावा दौराला आर्गेनिक्स व दौराला शुगर वर्क्स केमिकल प्लांट में अग्निशमन व्यवस्था में घोर कमी पाई गई है। हाल में जिला प्रशासन व सहायक निदेशक कारखाना की टीम ने इन सभी कारखानों का निरीक्षण किया था। इसके बाद सभी को आवश्यक उपाय के लिए नोटिस दिया गया है।
रवि प्रकाश सिंह, सहायक निदेशक कारखाना ने बताया कि चिह्नित पांचों कारखानों को विशेष उपाय करने के लिए कहा गया है। बाकी कारखानों का निरीक्षण भी जारी रहेगा।उन्होंने कहा कि यदि स्वीकृति के विपरीत अधिक रसायन या गैस का भंडारण मिलेगा तो सख्त कार्रवाई होगी। जिनके पास लाइसेंस है उन्हें नियमों का पालन करना होगा।
Alarm: रसायन दुर्घटना के ढेर पर बैठा मेरठ, ये पांच कारखाने अति खतरनाक श्रेणी में
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