मेरठ।
ट्यूबवेलों पर बिजली मीटर लगाने के विरोध में आज किसानों का सरकार के प्रति आक्रोश फूट पड़ा। वेस्ट के 14 जिलों का किसानों ने आज मेरठ ऊर्जा भवन में पहुँचकर डेरा डाल दिया। किसानों ने ऊर्जा भवन में सरकार के खिलाफ धरना दिया। किसानों ने आरोप था कि सरकार अपने वादे से मुकर रही है और किसानों का हित नहीं कर रही । किसानों ने कहा कि अगर सरकार ट्यूबवेल से बिजली मीटर लगाने का फैसला नहीं बदल सकती तो किसानों को मौत दे दे। किसान बिजली बिल चुका नहीं सकता। किसानों की मौत से सरकार को चैन मिलेगा।
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बिजली बिल और ट्यूबवेल पर मीटर लगाने की नीति के खिलाफ आज किसानों की महापंचायत हुई। जिसमें सहारनपुर, मुरादाबाद, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, बुलंदशहर, बिजनौर, नोएडा, शामली, मुजफ्फरनगर सहित वेस्ट के किसान ऊर्जा भवन पहुंचे। किसानों ने धरना दिया और कहा कि बीजेपी ने 2022 में किसानों को सरकार ने फ्री बिजली देने का वादा किया था। आज जब बीजेपी की सरकार बन गयी तो वो अपने चुनावी वादे से मुकर रही है। इसी के साथ किसानों के घरों में छापेमारी की जा रही है।
किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरण सिंह ने कहा कि बीजेपी सरकार ने 2014 में किसानों को फ्री बिजली का वादा किया और वोट लिया। वही छल दोबारा 2022 के चुनाव में बीजेपी सरकार ने किया। बीजेपी ने जीतने के बाद मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। बिजली मुफ्त हुई नहीं, बिल भी माफ नहीं हुआ। बल्कि सरकार ने ट्यूबवेलों पर मीटर और लगवाने शुरू कर दिए। पुलिस किसानों के घर पर छापेमारी कर रही है। आज हर गाँव का किसान दहशत में है। बिजली बिल के कारण कई किसानों की मौत हो चुकी है।
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किसानों ने कहा हमने सरकार को ईमानदारी से वोट किया। अब सरकार ईमानदारी से बिजली मुफ्त करे। किसानों ने कहा की उन्होंने सड़क, टोल नहीं रोका और किसी नेता को बंधक नहीं बनाया। किसान संवैधानिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं।
किसानों ने कहा किसान का सालाना बिल 18 हजार रुपए था। लेकिन जबसे ट्यूबवेल पर मीटर लगा 18 दिन का बिल 18हजार रुपए आ गया। सरकार मीटर से अच्छा है कि किसानों को सल्फास दे दे। नहीं तो इस बिल से रोज किसान मारेगा। बिल भरने के लिए किसान को जमीन बेचने पड़ेगी।

