मेरठ। इस बार निकाय चुनाव में समाजवादी पार्टी की कठिन परीक्षा है। एक तरफ जहां उसको सत्तादल भाजपा संगठन द्वारा बनाई मजबूत चक्रव्यूह से पार पाना है वहीं दूसरी ओर सपा को महापौर पद पर अपना प्रत्याशी बनाए रखना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। मेरठ में मौजूदा महापौर सुनीता वर्मा बसपा से चुनाव लड़कर जीती थीं। लेकिन बाद में सुनीता वर्मा ने अपने पति पूर्व विधायक के योगेश वर्मा के साथ सपा का दामन थाम लिया था।
मेरठ में नगर निगम के कुल 90 वार्ड हैं। जिसमें सपा ने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। सपा के पास 90 वार्ड में पार्षद के लिए 50 से अधिक के आवेदन आ गए हैं। जातीय समीकरण के साथ प्रत्याशियों के ताकत की थाह ली जा रही है। हालांकि अभी पूरा दारमोदार आरक्षण पर है। चर्चा है कि महापौर की सीट इस बार अनुसूचित जाति या फिर सामान्य के खाते में जा सकती है। हालांकि सपा दोनों ही स्थिति में मौजूद महापौर को चुनाव लड़ाने की स्थिति में है।
मेरठ नगर निगम चुनाव में सपा अभी तक अपने दम पर महापौर की सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी है। साल 2006 में महापौर पद पर सपा समर्थित लीलावती की जमानत जब्त हो गई थी। उस दौरान सपा के मात्र 10 पार्षद ही जीते थे। नगर पंचायत लावड़ पर सपा की जीत हुई थी। साल 2012 में सपा समर्थित महापौर प्रत्याशी रफीक अंसारी भी चुनाव हार गए थे। मेरठ महानगर में सपा के चार पार्षद ही जीत हासिल कर सके थे। साल 2017 में महापौर प्रत्याशी दीपू मनोठिया महापौर का चुनाव हार गई थीं। 2017 में सपा के चार पार्षद चुनाव जीते थे।
जबकि नगर पालिका सरधना पर सपा चुनाव जीती थी। निकाय चुनाव के माध्यम से सपा 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में अपनी जमीनी हकीकत परखेगी। इसी के साथ उस पर निगम चुनाव में अपनी ताकत दिखाने का भारी दबाव होगा। मेरठ में हुए विधानसभा चुनाव में सपा ने इस बार सात सीटों में से चार पर जीत हासिल की थी। इस बार सपा महापौर, नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्ष पदों के लिए पूरी ताकत झोकेगी। सपा के लिए ये अच्छी बात है कि इस बार उसके साथ रालोद भी है। 2017 के निगम चुनाव में रालोद का एक पार्षद जीता था।
सपा ने निकाय चुनाव के लिए कमेटी गठित की है। जिसमें विधायक स्वामी ओमवेश, मुजफ्फरनगर जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी और विधायक आशु मलिक शामिल हैं। ये तीन सदस्यीय कमेटी रणनीति तैयार कर रही है। कमेटी पिछले महीने मेरठ का दौरा कर चुकी है। सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने दावा कि नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत के चुनाव पूरी सक्रियता से लड़ेगी। वोट बनवाने पर इस समय जोर है। इस बार महापौर के साथ वार्ड पार्षद भी बड़ी संख्या में जीत दर्ज करेंगे।

