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मेरठ कॉलेज कार्यकारणी समिति चुनाव मामला: विवेक गर्ग ग्रुप ने मेरठ कालेज प्राचार्य को लिखा पत्र, मांगे कई जवाब, लगाए कई आरोप


मेरठ कॉलेज कार्यकारणी समिति चुनाव मामला:  विवेक गर्ग ग्रुप  ने मेरठ कालेज प्राचार्य को लिखा पत्र, मांगे कई जवाब, लगाए कई आरोप

मेरठ कॉलेज कार्यकारणी समिति चुनाव निरस्त करने का मामला लगातार सुर्ख़ियों में बना हुआ है. अब एकबार फिर अनिल कुमार गुप्ता और विवेक गर्ग ग्रुप ने प्राचार्य मेरठ कालेज को पत्र लिखकर चुनाव निरस्त करने के कारणों के बारे में पूछा, साथ ही दस्तावेज़ों में हेरफेर का आरोप भी लगाया है.

पत्र में लिखा है कि मेरठ कॉलेज प्रबंध समिति की वर्तमान चुनाव प्रक्रिया को निरस्त करने के लिए आपने पहला कारण यह बताया कि कोरोना महामारी से एक दल के प्रत्याशी संजीव गुप्ता की आकस्मिक मृत्यु हो गयी है।

पत्र में पूछा गया कि कृपया स्पष्ट करें कि इन चुनावों में किसी दल के प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे और क्या ये चुनाव दलीय आधार पर हो रहे थे ? यदि हाँ तो कृपया बताएं कि कॉलेज प्रबंध समिति के चुनाव हेतु कौन कौन से दल मान्यता प्राप्त थे और उन्हें किसने और कब मान्यता दी थी ? आपको ये कैसे ज्ञात हुआ कि कथित रूप से मृत प्रत्याशी किस दल से सम्बंधित थे ?

बदली परिस्थितियों में मतदाता सूची को दुरुस्त होना अनिवार्य होने की बात पर अनिल कुमार गुप्ता गुट पूछा कि किन किन सदस्यों की मृत्यु की आधिकारिक सूचना उनके मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ प्राप्त हुई थी, माह मार्च 2021 में 20 मार्च को आपके द्वारा जारी चुनाव कार्यक्रम में मतदाता सूचियों के संशोधन कर लिए गए थे और जिन मतदाताओं की मृत्यु के पुष्ट प्रमाण नहीं थे उनके नामों के साथ स्टार अथवा दो स्टार लगा दिए गए थे! अब चुनाव की तीन चौथाई प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद बिना किसी ठोस प्रमाण के “काफी सदस्यों की मौत हो चुकी है” मान कर मतदाता सूचियों का ‘दुरुस्त’ किये जाने का बहाना बनाकर चुनावी प्रक्रिया को क्यों निरस्त किया गया।

पत्र में यह भी जानकारी मांगी गयी कि आपके द्वारा 19 अप्रैल 2021 के पश्चात् चुनाव करने हेतु प्रशासन से कितनी बार और कब कब अनुमति मांगी गयी थी ? पात्र में आरोप लगाया गया है कि आपके द्वारा जिन सदस्यों के सूचना प्राप्त होना बताकर चुनाव की पूरी प्रक्रिया को निरस्त किया गया है वो पत्र भी कूट रचित है क्योंकि इस पत्र पर किसी भी सदस्य द्वारा अपने हस्ताक्षरों के नीचे दिनांक अंकित नहीं किया गया है और बाद में दूसरे कंप्यूटर द्वारा उस पर ३०-०५-२०२१ टंकित किया गया है। इस पत्र पर हस्ताक्षर राम कुमार गुप्ता को 25 जून को होटेल हायफ़न में बुलाकर लगभग सायं 9 बजे कराए गए थे। ये एक दंडनीय अपराध है।

पत्र में आरोप लगाया गया कि आपके द्वारा केवल पांच सदस्यों के कूटरचित पत्र को आधार बनाकर पूरी चुनावी प्रक्रिया को निरस्त किया जाना नितांत अनुचित है। दुनिया में किसी भी चुनाव में चुनाव की प्रक्रिया के काफी आगे बढ़ जाने के बाद केवल मतदान से पहले पांच मतदाताओं के कहने मात्र से चुनावी प्रक्रिया निरस्त नहीं की जाती है! आपका ये कृत्य लोकतान्त्रिक भावना का मजाक है! और आपके और अवैतनिक मंत्री के बीच हुई दुरभिसंधि को ही दर्शाता है।

पत्र में पूछा गया कि क्या इतना महत्वपूर्ण निर्णय केवल अवैतनिक मंत्री को भेजी गयी सूचना के आधार पर ही मान लिये जाने योग्य है। अगर ऐसा कोई निर्णय हुआ है तो उसकी पूरी कार्यवाही सार्वजानिक की जानी चाहिए थी।

जब 18 अप्रैल 2021 को मतदान के स्थगन का निर्णय लिया गया था और 20 मई को मतदान कराने का निर्णय लेने से पूर्व 19 अप्रैल 2021 को सभी प्रत्याशियों की बैठक बुलाकर आम सहमति से निर्णय लिया गया था तो कथित रूप से 01 जून को चुनाव निरस्तीकरण का महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पूर्व सभी प्रत्याशियों की बैठक क्यों नहीं बुलाई गयी। इससे भी स्पष्ट है कि कथित निर्णय सम्बन्धी पत्र बैक डेटिंग के द्वारा कूटरचित रूप से तैयार किया गया है।

पत्र में सवाल उठाया गया है कि क्या ये निर्णय सम्बन्धी कूटरचित पत्र कुलसचिव, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा अध्यक्ष/कार्यवाहक सचिव को भेजे गए पत्र के बाद फर्जी तरीके से तैयार नहीं किया गया है ताकि कुलपति महोदय द्वारा 28 जून की कार्यकारिणी की बैठक में नीतिगत निर्णय न लेने के निर्देशों की धज्जियां उड़ाकर उसे धता बताया जा सके।

पत्र में सवाल उठाया गया है कि कथित पत्र अवैतनिक मंत्री आर के गुप्ता द्वारा 01 जून में प्राप्त होना दर्शाया गया है और उस पर उसे ‘एग्जीक्यूटिव कमिटी में रख टिप्पणी अंकित की गयी है, तो फिर उस पत्र का उल्लेख 28 जून के लिए बुलाई गयी मीटिंग के सूचना पत्र में अन्य विचारणीय बिंदुओं के साथ क्यों नहीं किया गया है। क्या माना जाय कि उक्त पत्र भी बैक डेटिंग करके बाद में कूट रचित किया गया है।

पत्र में बताया गया है कि उक्त पत्र की प्रतिलिपियाँ जिलाधिकारी, कुलपति चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और डिप्टी रजिस्ट्रार, मेरठ को एंडोरस की गयी हैं लेकिन 29 जून तक भी उक्त प्रतियां सम्बंधित अधिकारीयों को अथवा उनके कार्यालयों को प्राप्त नहीं कराई गयी हैं! इससे भी यही प्रमाणित होता है कि उक्त कथित पत्र बैक डेटिंग करके कूट रचित किया गया है।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि आपके द्वारा चुनाव कार्यक्रम जारी करने सम्बन्धी पत्र 29 दिसंबर 2020 की प्रतियां नौ अधिकारियों को सूचनार्थ प्रेषित की गयी थीं जो यथा समय सम्बंधित को प्राप्त भी हो गयी थीं जबकि 01 जून 2021 के कथित कूटरचित पत्र की प्रतियां केवल तीन अधिकारियों को प्रेषित करना दर्शाया गया है और वो भी 29 दिन बाद तक सम्बंधित अधिकारीयों को प्राप्त नहीं कराई गयी हैं. इससे इस चुनाव निरस्तीकरण की बोगस कार्यवाही के पीछे किसी दूषित मानसिकता का पता चलता है।

पत्र के अंत में प्राचार्य मेरठ कालेज से चुनाव निरस्त्रीकरण की अवैध कार्यवाही को ख़त्म कर चुनाव की चालू प्रक्रिया को बहाल करते हुए शीघ्रातिशीघ्र मतदान की तिथि घोषित करने की मांग की गयी है. अभी देखना है कि मेरठ कॉलेज प्रबंध समिति पर काबिज़ मौजूदा गुट इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देता है.

पत्र पर अनिल कुमार गुप्ता, प्रत्याशी, अध्यक्ष, विवेक गर्ग प्रत्याशी सचिव, मोहित जैन प्रत्याशी उपाध्यक्ष और केशव बंधू, प्रत्याशी सहसचिव के हस्ताक्षर हैं. पत्र की प्रतिलिपियाँ कुलपति ,चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, जिला आयुक्त, जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, डिप्टी रेजिस्ट्रार, फ़र्म चिट्स व सॉसाययटीज़ और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को भेजी गयी हैं.

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