भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने के लिए शिवरात्रि का पर्व खासतौर से भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कहते हैं कि भोलेनाथ और मां पार्वती पर इस दिन जल चढ़ाने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार शिवरात्रि पर काल महाकाल रूद्र की उपासना करने से काल सर्प जैसे दोष से भी मुक्ति मिलती है।
ये रहेगा महूर्त
शिवरात्रि मुहूर्त सावन की महाशिवरात्रि चतुर्दशी तिथि में 6 अगस्त शाम 6:28 से 7 अगस्त की शाम 7:11 तक रहेगी।

ऐसे करें शिवरात्रि पर भोलेनाथ को प्रसन्न
भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों पर बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। सावन के महीने में विशेष तौर पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त की जा सकती है। शास्त्रों में भी मनोवांछित फल पाने के लिए शिवरात्रि का पर्व सर्वोत्तम बताया गया है। इस दिन शिव शंकर को प्रसन्न करने के लिए सुबह जल्दी उठकर पूजा का संकल्प करना चाहिए। स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहन कर भगवान भोलेनाथ का ध्यान करें। घर के मंदिर में दीया जलाएं और संभव हो तो व्रत भी करना चाहिए। इस दिन भगवान भोलेनाथ का गंगाजल से अभिषेक करें। भोलेनाथ के साथ ही मां पार्वती और उनके पुत्र गणेश जी की पूजा का विधान है । भगवान भोलेनाथ को उनके पसंदीदा वस्तुओं का भोग लगाना चाहिए। भोलेनाथ को गंगाजल दूध बेलपत्र अर्पित कर मनोवांछित फल की कामना करनी चाहिए।
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भोलेनाथ ने बताई थी सावन की महिमा
सावन के महीने का महत्व भोलेनाथ ने स्वयं सनत कुमारों को बताया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार सावन के महीने में सबसे ज्यादा बारिश होती है। भगवान शिव ने स्वयं बताया था कि मेरे तीन नेत्रों में बाए चंद्रमा, दाहिने में सूर्य, और मध्य नेत्र में अग्नि है। सूर्य जब कर्क राशि में गोचर करता है। तब सावन की शुरुआत होती है। जिससे विष पीने वाले भगवान शिव को ठंडक और सुकून मिलता है। यही वजह है कि सावन में शिव की पूजा का इतना गहरा महत्व है। वेद मंत्रों के साथ शिव को जल धारा अर्पित करने से आध्यात्मिक जीवन में उन्नति प्राप्त होती है। पुराणों में सावन और शिवरात्रि पर शिव अभिषेक को बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण बताया गया है।

शिवलिंग पर है जल चढ़ाने का खास महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार राक्षसों और देवताओं के बीच में समुद्र मंथन का समय सावन का ही बताया गया है। इसी मास में समुद्र मंथन में जो विष निकला था। उसे भोलेनाथ ने अपने कंठ में समाहित कर लिया था । लोक कल्याण और सृष्टि की रक्षा के लिए महादेव ने विष पिया जिसकी वजह से उनका पूरा कंठ नीला हो गया था। विष के प्रभाव की वजह से गर्मी अचानक बहुत बढ़ गई थी। इसी प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी देवताओं ने शिवजी पर जल अर्पण करना शुरू किया, इसीलिए शिवलिंग पर इस माह में जल चढ़ाने का खास महत्व है। शिव पुराण में भी कहा गया है कि शिव स्वयं ही जल है।

