मरीज के ठीक होने का पता नहीं, तीमारदार के बीमार पड़ने की पूरी संभावना
मेडिकल परिसर में घुमते हैं सुअर और बंदर, संसाधन तो हैं मगर व्यवस्था नहीं
मुनीश कुमार
मेरठ। उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ का एलएलआरएम मेडिकल काॅलेज में लोग दूर-दूर से इलाज कराने के लिये आते हैं। लोग उम्मीद करते हैं की उनके मरीज को बेहतर उपचार मिलेगा और अस्पताल में आने वाले तीमारदार को बुनियादी सुविधााएं मिलेंगी। मरीजों के उपचार को लेकर मेडिकल काॅलेज पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। मगर यहां मरीज के साथ आने वाले तीमारदारों के भी संक्रमित होने की आशंका बनी रहती है। क्योंकि मेडिकल काॅलेज के बदहाल माहौल में रहकर किसी का भी बीमार पड़ना बड़ी बात नहीं है।
ऐसा नहीं की एलएलआरएम मेडिकल काॅलेज में संसाधनों की कमी है। मगर कमी है तो संसाधनों का उपयोग करने और मरीजों और तीमारदारों को सुविधाएं प्रदान करने की इच्छाशक्ति की। हालात यह हैं कि मरीजों के साथ आने वाले तीमारदार ऐसी गर्मी में भी तपते टीन शेड के नीचे बैठने को मजबूर हैं। इस समय लाॅकडाउन के कारण दुकानें बंद हैं तो तीमारदार भी सामाजिक संगठनों द्वारा दिये जा रहे भोजन के सहारे दिन काटने को मजबूर हैं। मेडिकल परिसर में सुअर घुमते हैं तो वार्डों के बीच गलियारों में बंदर की आवाजाही लगी रहती है।
इन हालातों में मेडिकल में भर्ती मरीज तो ठीक हो सकता है मगर तीमारदार के बीमार पड़ने की पूरी संभावना रहती है। ऐसा नहीं कि यह नजारे कोविड काल के दौरान ही दिख रहे हों। सामान्य दिनों में भी मेडिकल काॅलेज का यही हाल रहता है।
अब भले ही सीएम योगी तारीफ कर जायें मगर हकीकत यही है कि संसाधन होने के बावजूद मेडिकल आने वाले मरीजों से लेकर तीमारदार तक खुद का हाल बेहाल है।

