दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद राजधानी में अवैध निर्माण, जर्जर इमारतों और बिल्डिंग नियमों के उल्लंघन के खिलाफ नगर निगम का अभियान तेज हो गया है। MCD की टीमें दिल्ली के सभी 12 जोन में इमारतों की जांच कर रही हैं और खामियां मिलने पर नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है।
गुरुवार को MCD ने 41 जगहों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की, जबकि 61 संपत्तियों को सील किया गया। इसके अलावा 32 संपत्तियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और तीन मामलों में ध्वस्तीकरण के आदेश भी दिए गए।
गांधी विहार में 65 इमारतें खतरनाक घोषित
सत्य निकेतन हादसे के बाद नॉर्थ दिल्ली के गांधी विहार में भी जर्जर और झुकी हुई इमारतों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया गया है।
MCD की जांच में गांधी विहार के एफ-ब्लॉक की 65 इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया है।
इलाके में कई मकान एक तरफ झुके हुए पाए गए हैं। कुछ इमारतों के बीच सिर्फ पांच इंच से लेकर दो फीट तक का अंतर रह गया है।
सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से ऐसी इमारतों को खाली करने के निर्देश दिए हैं।
ईस्ट, वेस्ट और सेंट्रल दिल्ली में कार्रवाई
MCD ने गुरुवार को ईस्ट, वेस्ट और सेंट्रल जोन में भी अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की।
ईस्ट जोन में खुरेजी खास, जगतपुरी और लक्ष्मी नगर समेत कई इलाकों में कार्रवाई की गई।
वेस्ट जोन में पश्चिम पुरी, मादीपुर, सुभाष नगर, सोम बाजार रोड, विपिन गार्डन, उत्तम नगर, बक्करवाला रोड, नंगली विहार, निहाल विहार और नांगलोई में ध्वस्तीकरण किया गया।
सेंट्रल जोन के मदनपुर खादर एक्सटेंशन में एक G+5 इमारत के खिलाफ कार्रवाई की गई। पांचवीं मंजिल के चार पैनल काटने के बाद पूरी इमारत को सील कर दिया गया।
कूचा महाजनी में 54 दुकानें सील
चांदनी चौक के कूचा महाजनी ज्वेलरी मार्केट में भी MCD की कार्रवाई जारी है।
नगर निगम की टीम ने अलग-अलग इमारतों के बेसमेंट में बनी दुकानों को सील किया है। अब तक कुल 54 दुकानें सील की जा चुकी हैं।
इस कार्रवाई से कारोबारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि सीलिंग की वजह से उनके कारोबार पर असर पड़ रहा है।
राजधानी के कई इलाकों में जर्जर इमारतों पर हथौड़ों और ड्रिल मशीनों से कार्रवाई की जा रही है, जबकि कुछ जगह बुलडोजर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
जिन इमारतों में हादसे का खतरा है, उन्हें पहले खाली कराया जा रहा है और इसके बाद सीलिंग या ध्वस्तीकरण किया जा रहा है।
MCD के तीन अधिकारी सस्पेंड
अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान के बीच MCD ने अपने तीन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है।
गुरुवार को साउथ वेस्ट जोन के भवन निर्माण विभाग से जुड़े AE रविंदर कुमार, JE सुमन सौरभ और JE मोहित यादव को सस्पेंड कर दिया गया।
इससे पहले सत्य निकेतन हादसे के बाद भी MCD के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया था।
इससे संकेत मिलता है कि कार्रवाई केवल अवैध निर्माण करने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले निगम अधिकारियों पर भी कदम उठाए जा रहे हैं।
1,355 PG इमारतों का सर्वे
MCD की टीमें दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में चल रहे PG का भी सर्वे कर रही हैं।
अब तक 1,355 इमारतों का सर्वे किया जा चुका है। इन इमारतों में करीब 27 हजार छात्र रह रहे हैं।
सर्वे में 1,304 इमारतें सुरक्षित पाई गईं, जिनमें 26,917 लोग रह रहे हैं।
वहीं तीन इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया है, जबकि नौ इमारतों में बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत पाई गई है।
अवैध PG और इमारतों पर हो रही कार्रवाई के कारण कुछ छात्रों के सामने रहने की समस्या भी खड़ी हो गई है।
छात्रों के लिए 18 सदस्यीय हाई-पावर कमेटी
छात्रों की समस्या को देखते हुए दिल्ली के LG तरनजीत सिंह संधू ने 18 सदस्यीय हाई-पावर कमेटी के गठन को मंजूरी दी है।
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है।
कमेटी को PG से जुड़े मौजूदा नियमों की समीक्षा करने और छात्रों के लिए वैकल्पिक रहने की व्यवस्था तलाशने की जिम्मेदारी दी गई है।
कमेटी छात्रों के लिए वैकल्पिक हॉस्टल विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन करेगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि खाली पड़ी सरकारी इमारतों का उपयोग छात्रों के रहने के लिए किया जा सकता है या नहीं।
कमेटी PG से संबंधित मौजूदा नियमों की समीक्षा करेगी और गठन की तारीख से 60 दिनों के भीतर ठोस सिफारिशों के साथ अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
दिल्ली में बनेगी अपनी SDRF
दिल्ली सरकार ने प्राकृतिक और मानवीय आपदाओं से निपटने की क्षमता मजबूत करने के लिए अपनी स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स यानी SDRF बनाने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में गुरुवार को दिल्ली सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें NDRF अधिकारियों के साथ SDRF के गठन पर चर्चा की गई।
योजना के तहत दिल्ली में SDRF की एक बटालियन बनाई जाएगी, जिसमें अधिकतम 1,100 जवान होंगे।
यह बटालियन दिल्ली सरकार के अधीन काम करेगी और जवानों को आवश्यक प्रशिक्षण NDRF की ओर से दिया जाएगा।
इसके अलावा फायर डिपार्टमेंट और सिविल डिफेंस वॉलंटियरों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि किसी बड़े हादसे या आपदा की स्थिति में राहत और बचाव अभियान तेजी से चलाया जा सके।
