लखनऊ। आजम खान के नाम पर मुस्लिम वोट बैंक को लेकर मची सियासत के बीच बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती की भी पैनी नजर बनी हुई है। मायावती ने बहुजन समाज पार्टी की रामपुर इकाई को यह निर्देश दिया है कि आजम खान के परिवार ने जिस तरीके की उथल-पुथल मची हुई है उस पर अपनी नजर बनाए रखें और रिपोर्ट देते रहें। गौरतलब है कि बहुजन समाज पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद दलित मुस्लिम गठजोड़ को एक साथ लाने में लगी हुई है।
मायावती की कोशिश है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले मुस्लिम वोट बैंक को अपने पाले में लाया जा सके। इसको लेकर लगातार मायावती बयान बाजी भी कर रही हैं और समाजवादी पार्टी पर हमलावर भी हैं। मायावती की कोशिश है कि आजम खां के बहाने मुस्लिम वोट बैंक में यह संदेश देने की कोशिश करें कि उनकी असली हितैषी बहुजन समाज पार्टी ही है। बसपा मुखिया की लगातार कोशिश है कि यह संदेश दिया जाए कि भारतीय जनता पार्टी को सिर्फ दलित और मुस्लिम ही मिलकर रोक सकते हैं।
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आजम खान के मीडिया प्रभारी फतेह अली खान सानु ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर जब से हमला बोला है तब से यूपी की सियासत गरमाई हुई है। कांग्रेस से लेकर के तमाम दूसरे राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं वहीं भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृजभूषण सिंह ने भी आजम खान के पक्ष में बोलकर गरमाई हुई सियासत को और हवा दे दी है। वहीं समाजवादी पार्टी में पहले से ही शिवपाल सिंह यादव की नाराजगी को लेकर उथल-पुथल मची हुई है वहीं अब आजम खां के खेमे से भी हो रही बयानबाजी ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गौरतलब है कि आजम खान से मिलने वालों में शिवपाल सिंह यादव रालोद मुखिया जयंत चौधरी और कांग्रेसी नेता प्रमोद कृष्णम शामिल है। वही चंद्रशेखर आजाद ने भी मिलने जाने का ऐलान किया हुआ है हालांकि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आजम खान के बेटे विधायक अब्दुल्ला से मुलाकात की है।
मायावती ने भी बनाई नजर
आजम खान को लेकर मचे विवाद पर मायावती ने भी अपनी नजर बना ली है। बसपा के रणनीतिकारों का मानना है कि इस बार समाजवादी पार्टी की तरफ मुस्लिम वोट बैंक एकतरफा गया हुआ था इसके बावजूद सरकार नहीं बन पाई है। ऐसे में मुस्लिमों को यह संदेश देने की कोशिश है कि वह अगर बसपा की तरफ आते हैं तो भी भाजपा को रोका जा सकता। 2007 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के साथ मुस्लिम वोट बैंक भी आया था और इसी उदाहरण के साथ बसपा मुस्लिमों को रिझाने में लगी हुई है।
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बसपा का यह मानना है कि अगर मुस्लिम वोट बैंक उसके साथ आता है तो एक बार फिर से संगठन खड़ा हो सकता है। यही कारण है कि मायावती ने पार्टी नेताओं को यह निर्देश दिया है कि रामपुर की सियासत पर पैनी नजर बनाए रखें। साथ ही यह भी कहा है कि आजम खान के बहाने मुस्लिमों के नाराज होने की जो खबर आ रही है उसमें कितनी सच्चाई है इसकी भी रिपोर्ट पार्टी को दें। इसके अलावा आजम खान आगे चलकर क्या निर्णय ले सकते हैं इसको भी लेकर पार्टी नेता सजग रहें।
