मेरठ। प्रदेश की राजनीति में बुरे दिन झेल रही बसपा अब नए जोश के साथ आगामी निकाय चुनाव में उतरेगी। इसके लिए बसपा प्रमुख मायावती ने दो दिन राजधानी लखनऊ में पार्टी जोन प्रभारियों के अलावा जिलाध्यक्ष के साथ बैठक की। जिसमें निकाय चुनाव के अलावा संगठन की मजबूती और 2024 में होने वाले आम चुनाव की तैयारियों की जमीनी हकीकत परखी गई। इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बसपा की ग्राउंड लेवल पर सक्रियता और मतदाताओं के बीच पैठ बनाने की बात कही। बता दें कि पहले 2019 में आम चुनाव और उसके बाद 2022 में विधानसभा चुनाव में बसपा बुरी तरह से पराजित हुई। हालात ये रही कि जिस बसपा के प्रत्याशियों की जीत की संख्या तीन अंकों में होती थी। आज वह घटकर इकाई के अंक पर पहुंच गई है।
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विधानसभा चुनाव में औधे मुंह गिरी बसपा ने खुद ही समीक्षा करनी शुरू की। हार की समीक्षा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने यह पाया कि उसका कैडर वोट दलित आज भी उसके साथ ही है। अब पार्टी नए सिरे से प्रदेश में आने वाले चुनावों के लिए तैयारी कर रही है। बता दें कि बसपा शुरू से ही निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव से हमेशा दूर रही। लेकिन आज उसी बसपा और उसकी प्रमुख मायावती की मजबूरी ये निकाय चुनाव बन गए हैं। बसपा अब पूरी तैयारी के साथ निकाय चुनाव में उतरने का मन बना चुकी है।
बसपा प्रमुख मायावती को पता है कि अगर प्रदेश की सत्ता में वापसी करनी है तो निकाय चुनाव के माध्यम से मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनानी होगी। इसी निकाय चुनाव को लेकर बसपा ने दो दिन पार्टी के जोन प्रभारियों के अलावा पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक की। शुक्रवार 27 मई को बसपा मुखिया मायावती ने जोन प्रभारियों की बैठक ली थी। जबकि आज शनिवार को जिलाध्यक्षों के साथ बैठक कर सभी को निकाय चुनाव की जिम्मेदारियां सौंपी गई।
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बसपा ने बीते तीन-चार वर्ष में हुए चुनावों में बड़ा भारी नुकसान उठाया है। 2007 में बिना किसी सहयोगी दल के पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई बसपा को 2012 में हार का स्वाद प्रदेश के मतदाताओं ने चखा दिया था। इसके बाद से बसपा को लगातार झटके लगते रहे। 2017 में भाजपा ने प्रदेश की बागड़ोर संभाली तो उसके बाद से बसपा का वोट बैंक खिसकता गया। इतना ही नहीं पार्टी प्रमुख मायावती के पुराने सहयोगी भी एक के बाद एक उनका साथ छोड़ते चले गए। यही कारण रहा कि विधानसभा चुनाव 2022 में 403 सीट पर प्रत्याशी उतारने के बाद भी बसपा को मात्र एक सीट पर संतोष करना पड़ा था।
