मनु मीन्स मैजिक, देश बोला-दिल मांगे मोर

आर्टिकल/इंटरव्यूमनु मीन्स मैजिक, देश बोला-दिल मांगे मोर

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अमित बिश्नोई
पेरिस ओलंपिक में भारतीय दस्ते में शूटिंग दल सबसे बड़ा था, 21 खिलाडियों के इस शूटिंग स्क्वाड में महिला शूटर की संख्या 11 है और इन्ही में एक नाम हरियाणा की मनु भाकर का है जिन्होंने अपना ओलम्पिक डेब्यू पिछले टोक्यो ओलम्पिक में किया था, उस समय भी मनु मैजिक की बात कही जा रही थी लेकिन ऐन वक्त पर उनकी पिस्टल ने उनको धोखा दे दिया। उस वक्त मनु भाकर का आंसुओं से भीगा चेहरा आज भी लोगों को याद होगा। मनु टोक्यो से जब भारत लौटी थीं, एयरपोर्ट से चुपचाप सर झुकाये वो बाहर निकल गयी थी लेकिन पेरिस ओलम्पिक में वो लगातार जिस तरह इतिहास पर इतिहास बना रही हैं यकीनन इसबार जब वो वतन वापस लौटेंगी तो नज़ारा पिछली बार से बिलकुल उलट होगा, सिर्फ तीन दिनों में दो मैडल हासिल करके आज वो देश की सबसे लाड़ली बेटी बन चुकी हैं और पूरा देश उनके स्वागत के लिए अभी से तैयारी कर रहा है।

पेरिस ओलम्पिक से पहले भारत की एक भी महिला शूटर ओलम्पिक में पदक नहीं जीत पाई थी यहाँ तक कि पिछले 12 वर्षों से किसी पुरुष ने भी ओलम्पिक में मैडल हासिल नहीं किया था. लेकिन टोक्यो ओलम्पिक में दुर्भाग्य का शिकार बनी मनु भाकर ने न सिर्फ शूटिंग में 12 साल का सूखा ख़त्म करके शूटिंग में ओलम्पिक मेडल हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला शूटर बनी बल्कि तीन दिनों में ही सरबजोत के साथ मिक्स टीम इवेंट में एक और मेडल हासिल करके वो कारनामा कर डाला जो आज तक किसी भी भारतीय एथलीट ने नहीं किया यानि एक ही ओलम्पिक में दो मेडल हासिल करना। ये सिर्फ शूटिंग में नहीं बल्कि हर स्पर्धा में रिकॉर्ड है और मनु भाकर का जिस तरह पेरिस ओलम्पिक में मैजिक चल रहा है उससे इस बात की पूरी सम्भावना है उनकी पसंदीदा 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में भी पदक उनकी झोली में आ सकता है और ऐसा हो गया तो ये बहुत अद्भुत कारनामा होगा और मनु भाकर की ऐसी उपलब्धि होगी जिसे पार पाना दूसरे एथलीटों के लिए आसान नहीं होगा।

मनु भाकर के पास एक और इतिहास रचने का मौका है. मनु द्वारा जीते गए दोनों पदक अभी ब्रॉन्ज़ के रूप में है, 25 मीटर व्यक्तिगत पिस्टल स्पर्धा में वो अपने मैडल का रंग बदल सकती हैं और सोने पे सुहागा करते हुए एक ही ओलम्पिक में तीन मैडल हासिल करने का अदिव्तीय कीर्तिमान बना सकती हैं। मनु की फॉर्म देखते हुए कहा जा सकता है कि इसकी सम्भावना ज़्यादा है. 10 मीटर पिस्टल स्पर्धा में बेहद मामूली अंतर से वो सिल्वर या गोल्ड के मुकाबले से चूक गयी लेकिन उनका धैर्य और उनकी एकाग्रता देखने लायक थी. इसी धैर्य और एकाग्रता का प्रदर्शन उन्होंने सरबजोत सिंह के साथ मिक्स प्रतियोगिता में भी किया था। मनु के शानदार प्रदर्शन की वजह से कई सीरीजों में सरबजोत सिंह के औसत प्रदर्शन के बावजूद भारत सीरीज़ जीतने में कामयाब रहा था, कहा जा सकता है कि मनु के शानदार प्रदर्शन ने सरबजोत की कमियों को ढकते हुए देश को पेरिस ओलम्पिक में दूसरा ओलम्पिक पदक दिलाने में कामयाबी हासिल की.

मनु भाकर के तेवरों को देखते हुए लगता नहीं कि वो ओलम्पिक में दो मेडलों से संतुष्ट हैं, हर इंसान की तरह वो भी दिल मांगे मोर की राह पर चल रही हैं, एक ही ओलम्पिक में आज़ाद भारत की पहली महिला एथलीट बनने वाली मनु भाकर इस मौके को ऐसा बनाना चाहती हैं जो अगले 124 सालों के लिए एक यादगार बन जाय. ऐसे मौके किसी भी एथलिट के जीवन में बार बार नहीं आते लेकिन मनु के जीवन में आया है. मनु ने उन स्पर्धाओं में मैडल हासिल कर लिया जिनमें उनको माहिर या विशेषज्ञ नहीं माना जाता है लेकिन 25 मीटर स्पर्धा की वो स्पेशलिस्ट हैं, उनकी पसंदीदा स्पर्धा है जिसपर उनकी बहुत अच्छी तैयारी भी है तो इससे अच्छा मौका उनके लिए और क्या होगा। देश के 140 करोड़ लोगों की दुआएं उनके साथ हैं. उन्हें खुद भी यकीन है कि वो ऐसा कर सकती हैं. आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है, उनका भी और देश का भी. मनु ने पेरिस में एक नई इबारत लिखी है जो देश की आधी आबादी के लिए प्रेरणा का काम करेगी। मनु ने पेरिस में जो कारनामा कर दिखाया है यकीनन आने वाले दिनों में और भी मनु देश में पैदा होंगी और देश का का नाम रौशन करेंगी। फिलहाल तो निगाहें तीसरे मैडल पर हैं और देश के लोगों की यही दुआ है कि मनु का मैजिक एकबार फिर चले और उन्हें एक और मेडल मिले, बल्कि उस मेडल का रंग भी बदले।

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